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 गोलीकांड के 36 घंटे बाद पुलिस की निगरानी में शुरू हुआ कोल क्रशर का काम

गोलीकांड के 36 घंटे बाद पुलिस की निगरानी में शुरू हुआ कोल क्रशर का काम

संक्षेप:

भुरकुंडा में सीसीएल सौंदा गोलीकांड के 36 घंटे बाद कोल क्रशर का संचालन पुनः शुरू हुआ। पुलिस ने घटना के बाद सुरक्षा बढ़ाई है और राहुल दुबे गैंग के गुर्गों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। गैंग...

Aug 31, 2025 09:54 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रामगढ़
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भुरकुंडा, निज प्रतिनिधि। सीसीएल सौंदा में 29 अगस्त की रात हुए गोलीकांड के 36 घंटे बाद कोल क्रशर का संचालन पुलिस की कड़ी निगरानी में सोमवार को दोबारा शुरू हुआ। इसके साथ ही सौंदा बी साइडिंग के लिए क्रश कोल की ढुलाई भी शुरू हो गई है। गोलीकांड की घटना के बाद अपराधियों की ओर से दोबारा हमले की आशंका को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई है। जवान पूरे इलाके पर सतर्क निगाह रखे हुए हैं। घटना को लेकर पुलिस राहुल दुबे गैंग पर शिकंजा कसने में जुट गई है। गैंग के गुर्गों को पकड़ने के लिए रामगढ़, हजारीबाग सहित अन्य जिलों में लगातार छापामारी की जा रही है।

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पुलिस ने मामले को गंभीर चुनौती मानते हुए गैंग के नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है। मुखबिर तंत्र और साइबर सेल की मदद से राहुल दुबे के संपर्क में रहे सफेदपोशों पर भी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, राहुल दुबे और उसके गुर्गों ने सीसीएल बरका-सयाल एरिया के कई ठेकेदारों से रंगदारी की मांग की थी, जिनसे पुलिस पूछताछ कर रही है। कॉल डिटेल्स से इसका खुलासा हुआ है। गैंग ने सीसीएल सौंदा स्थित कोल क्रशर के संचालक पप्पू जैन से भी संपर्क किया था, लेकिन पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी गई। इससे अपराधियों का हौसला बढ़ा और उन्होंने गोलीकांड को अंजाम दे डाला। -- छह दिन पहले हुई थी अंश दुबे की गिरफ्तारी सीसीएल सौंदा गोलीकांड से महज छह दिन पहले राहुल दुबे गैंग के अंश दुबे को पुलिस ने गढ़वा से गिरफ्तार किया था। उससे पहले 18 अगस्त की रात गैंग ने सयाल प्रोजेक्ट में काम कर रही आउटसोर्सिंग कंपनी पीएसएमआई के गेट पर गोलीबारी की थी। इस केस में अंश दुबे की संलिप्तता पाई गई थी। गैंग ने सिर्फ 11 दिन के अंतराल में बरका-सयाल एरिया के दो अलग-अलग प्रोजेक्ट में धावा बोल कर सनसनी फैलाई है। यही वजह है कि पुलिस राहुल दुबे गैंग के नेटवर्क को तोड़ने का जुगत लगा रही है। पुलिस का यह भी मानना है कि लोकल इनपुट के आधार पर ही घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। इसलिए इलाके हिस्ट्रीशीटर भी पुलिस की रडार में हैं।