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11 अगस्त, 2020|11:49|IST

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कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद का 140वीं जयंती मनाई गई

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शहीद भगत सिंह पुस्तकालय घुटूवा बस्ती में शुक्रवार को कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद का 140वीं जयंती मनाई गई। मौके पर माले के देवकीनंदन बेदिया, सहित पुस्तकालय सचिव सुरेंद्र कुमार बेदिया, अमोल घोषाल एवं छात्र नौजवानों ने उनके चित्र पर बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर एक मिनट का मौन श्रद्धाजंलि दी। श्री बेदिया ने संबोधित करते हुए कहा की मुंशी प्रेमचंद एक यथार्थवादी साहित्यकार थे। इनकी लेखनी समाज की सच्चाइयों को प्रतिबिंबित करती है। इन्होंने भारतीय समाज में घटित होने वाली गरीबों मजदूरों, मजलूमों, किसानों की पीड़ा, उनकी व्यथा, शोषण के बारीक हथियारों का बड़ी ही सुक्ष्मता के साथ यथार्थ चित्रण किया है। क्योंकि इनके अनवरत साहित्य लेखन-कहानियों, लेख या उपन्यास में अपनी स्पष्टवादी लेखनी से भारतीय जनमानस में एक शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है। उस दौर में उसने गरीबों, किसानों, मजदूरों पर होने वाले जुल्म -अत्याचार को बहुत ही बारीकी से लिखकर मानव मन को झकझोरने का काम किया। इनका जीवन स्वंय एक आदर्श प्रस्तुत करता है। इनकी सरलता, ईमानदारी, दृढ़ता, पूंजीपतियों के प्रति आक्रोश, स्त्रियों के प्रति सम्मान और बराबरी का दर्जा इनके सम्पूर्ण साहित्यक यात्रा में परिलक्षित होता है। इनके सम्पूर्ण साहित्यक यात्रा में समाजोन्मुखी दृष्टि मिलती है। आजादी से पूर्व के समाज से लेकर स्वतंत्रता की लड़ाई में इनका साहित्यक योगदान रहा है। आज 70 साल व्यतीत होने के बावजूद भी इनका साहित्यक विरासत प्रासंगिक बना हुआ है। छात्र नौजवानों को इनके द्वारा लिखी गई साहित्य का अध्ययन कर उनसे प्रेरणा ग्रहण कर जीवन को सही दिशा में संचालित करने का पहल कर समाज को बेहतर बनाने का संकल्प लेना होगा।

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  • Web Title:140th birth anniversary of pen soldier Sage Munshi Premchand was celebrated