धुर्वा में रैयतों को मिले मकानों की होगी जांच, मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताई वजह
झारखंड के नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि एचईसी के विस्थापित लोगों के लिए बने मकानों के आवंटन की प्रक्रिया पर अगले सत्र से पहले कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। आइए जानते हैं उन्होंने क्या-क्या कहा।

झारखंड के नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि एचईसी के विस्थापित लोगों के लिए बने मकानों के आवंटन की प्रक्रिया पर अगले सत्र से पहले कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश का एकमात्र उदाहरण होगा, जहां विस्थापित रैयतों के सत्यापन की प्रक्रिया एक निजी परामर्श कंपनी (कोलकाता के मेसर्स सीईएस प्राइवेट लिमिटेड) से कराई गई। कंपनी ने अपने सूची में 393 रैयतों की बात कर इन्हें आवास आवंटित कराने की अनुशंसा की।
सुदिव्य कुमार ने बताई जांच की वजह
मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि जिस परामर्श संस्था पर कोई कानूनी जवाबदेही नहीं है, क्या उसके तथ्यों और गुणवत्ता की जांच नहीं होनी चाहिए। यह जांच इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि सर्वेक्षण सूची में 108 वैसे लोगों को जोड़ा गया है, जो वास्तविक रैयत ही नहीं है। मुड़मा मौजा में परामर्शी संस्था द्वारा 55 लोगों की सूची दी गई। जब जिला प्रशासन ने इसकी स्थलीय जांच की, तो इसका रैयतों के पंचाटी से कोई संबंध नहीं पाया गया। इसी तरह आनी गांव में विस्थापित परिवारों की संख्या 42 बतायी गई, जिनमें 30 का रैयतों से कोई संबंध नहीं था। कुटे गांव में 90 परिवारों की संख्या बताई। जब सत्यापन किया गया, तो इसमें भी 53 लोगों का नाम मूल रैयतों से मेल नहीं खाता है। जब इस सूचीबद्ध रैयतों का नाम आया तो सर्वे करने गए जांच कर्मियों को ग्रामीणों का विरोध भी झेलना पड़ा। नगर विकास मंत्री ने उक्त बातें बजट सत्र के दौरान शनिवार को हटिया से भाजपा विधायक नवीन जायसवाल के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के पूछे सवाल पर दिया।
393 रैयतों की बनाई गई है सूची
मंत्री ने कहा कि अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए सर्वेक्षण में बाहरी लोगों को सूची में जोड़ते हुए 393 रैयतों की सूची बनाई गई। झारखंड सरकार किसी भी हाल में बाहरी लोगों को जमीन या मकान आवंटित नहीं होने देगी। ऐसे में उपलब्ध सूची की जांच होनी आवश्यक है।
212 करोड़ की लागत से बना मकान, छह वर्ष बाद भी रैयतों को आवंटन नहीं
बता दें भाजपा के हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने पूछा था कि राजधानी के एचईसी स्थित कुटे, तिरिल, मुड़मा आदि गांवों के विस्थापितों के लिए 400 मकान बनकर तैयार हैं। काफी संघर्षों के बाद वर्ष 2016 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार में एचईसी के विस्थापितों के लिए 57 एकड़ जमीन में 212 करोड़ रुपये की लागत से मकान बनवाए थे। वर्ष 2019 में निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद वर्तमान राज्य सरकार ने विस्थापितों को आज तक उन्हें मकानों का आवंटन नहीं किया है।
विस्थापितों के हक को किसी भी हाल में नहीं मारेगी सरकार
विधायक नवीन जायसवाल ने पूछा कि क्या मकान निर्माण के बाद रैयतों से अधिग्रहित अतिरिक्त जमीन वापस की जाएगी कि नहीं। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून-2013 और हेमंत सोरेन सरकार की घोषणा पत्र में रैयतों की सरप्लस जमीन वापस करने की बात की गई थी। इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार ने हाईकोर्ट के वर्ष 2009 के दिए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि जो जमीन अधिग्रहित होने के बाद सरकार के पास है, वह किसी एग्जीक्यूट ऑर्डर के बाद रैयतों को वापस नहीं दी जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हेमंत सोरेन सरकार विस्थापितों के हक को किसी भी हाल में नहीं मारने देगी। लेकिन उन्हीं विस्थापितों को जमीन वापस होगी, जो वास्तवित रैयत होंगे।
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