Writers expressed deep condolences on the death of the writer Dr Khagendra Thakur - साहित्यकार डॉ खगेन्द्र ठाकुर के निधन पर साहित्यकारों ने गहरी संवेदना व्यक्त की DA Image
18 फरवरी, 2020|3:24|IST

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साहित्यकार डॉ खगेन्द्र ठाकुर के निधन पर साहित्यकारों ने गहरी संवेदना व्यक्त की

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हिन्दी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर और आलोचक डॉ खगेन्द्र ठाकुर का आकस्मिक निधन सोमवार को हो गया। इप्टा और प्रगतिशील लेखक ने डॉ ठाकुर के निधन पर शोक व्यक्त किया है। वक्ताओं ने कहा कि डॉ ठाकुर के निधन को साहित्य जगत में प्रगतिशील स्तंभ का ढह जाना बताया। वे बिहार और झारखंड समेत देश में प्रगतिशील साहित्य की रचना के साथ मजदूर-किसान आंदोलन के साथ जुड़े रहे और आंदोलन का नेतृत्व करते रहे। वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय परिषद के कई बार सदस्य निर्वाचित हुए। पार्टी के झारखंड राज्य के सहायक सचिव भी रह चुके थे। डॉ ठाकुर का जाने से पार्टी, मजदूर, किसान आंदोलन एवं हिंदी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। शोक प्रकट करने वालों में इप्टा व उपेंद्र मिश्रा, शैलेंद्र कुमार, शब्बीर अहमद, नुदरत नवाज, प्रेम प्रकाश, राजीव कुमार, गौतम कुमार, केडी सिंह, मुकुल बाजपेई, शशि पांडेय, गोपाल सिंह, अमन चक्र, शिशुपाल सिंह,रविशंकर समेत अन्य लोगो कर नाम शामिल है। तब ऐसा न लगा था कि वह अचानक जुदा हो जाएंगे: एनपीपू के पूर्व सहायक प्राध्यापक सह फिलवक्त इलाहाबाद विवि के एसोसिएट प्राध्यापक डॉ. कुमार वीरेन्द्र ने डॉ. खगेन्द्र ठाकुर के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि खगेन्द्र ठाकुर से परसों रात (11 जनवरी की रात)करीब नौ बजे मोबाइल पर बात हुई थी, तब ऐसा न लगा था कि वह अचानक जुदा हो जाएंगे। खगेन्द्र ठाकुर एक बेहतर इंसान थे और समाज की बेहतरी के लिए चिंता करते थे। इतने सहज थे कि गांव-जवार की छोटी गोष्ठियों से लेकर महानगरों और अकादमिक संस्थानों में उनकी खूब आवाजाही थी। अम्बा, औरंगाबाद, पलामू जैसी छोटी जगहों पर लोगों ने उन्हें करीब से देखा तो बनारस, इलाहाबाद और दिल्ली के लोगों से उन्हें सुना समझा। उनके आकस्मिक निधन से हिंदी साहित्य और समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि नौ सितंबर, 1937 को गोड्डा, झारखंड के मालिनी गांव में जन्म लेने वाले खगेन्द्र ठाकुर कवि, आलोचक और व्यंग्य-लेखक के रूप में काफी ख्याति हासिल की थी। एक अच्छे वक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी उनकी विशिष्ट पहचान थी। राजनीतिक चेतना से संपन्न खगेन्द्र ठाकुर ने पटना और रांची में रहते हुए देश-देशांतर की वैचारिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक आंदोलनों में सक्रिय सहभागिता की थी। प्रगतिशील लेखक संघ से गहरा जुड़ाव रखनेवाले खगेन्द्र ठाकुर ने हिन्दी साहित्य को कई बहुमूल्य कृतियां दीं-मसलन -धार एक व्याकुल, रक्त कमल परती पर(कविता संग्रह), छायावादी काव्य की भाषा(शोध), देह धरे को दंड, ईश्वर से भेंटवार्ता (व्यंग्यलेख -संग्रह); आलोचना के बहाने, कविता का वर्तमान, दिव्या का सौंदर्य, समय, समाज और मनुष्य, प्रगतिशील आंदोलन के इतिहास पुरुष, दिनकर-व्यक्तित्व और कृतित्व, नागार्जुन का कवि कर्म, उपन्यास की महान परम्परा, हिन्दी कहानी आज-पृष्ठभूमि और परिप्रेक्ष्य(आलोचना) तथा आज का वैचारिक संघर्ष और मार्क्सवादी विकल्प की प्रक्रिया(वैचारिक लेखन) आदि।

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