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24 नवंबर, 2020|11:27|IST

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जनजाति सुरक्षा मंच ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

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जनजाति सुरक्षा मंच पलामू ईकाई ने धर्मांतरित जनजातियों को अनुसूचित जनजाति से हटाकर उन्हें दिये जाने वाले आरक्षण समाप्त करने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा है। सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि धर्मांतरित जनजातियों को आरक्षण सुविधाएं दिये जाने के विरोध में एकीकृत बिहार के तत्कालीन लोकसभा सांसद कार्तिक उरांव द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को वर्ष 1970 में आवेदन दिया था। उस आवेदन को न तो लोकसभा के पटल पर रखा गया था और न ही उस आवेदन को खारिज किया गया था।

बल्कि उसको ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। मंच ने कहा है कि वास्तवित जनजातियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ मंच वर्षों से संघर्ष कर रहा है। अभी तक बहुत सारी सुविधाओं को धर्मांतरित लोगों द्वारा उपयोग किया जाता रहा है,जो आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टी से वास्तविक जनजातियों से तुलना में काफी अच्छी स्थिति में हैं। मंच ने मांग की है कि कई दशकों से लंबित इस समस्या के समाधान को प्राथमिकता के आधार पर कर अनुसूचित जनजातियों के साथ हो रहे अन्याय को हमेशा के लिए समाप्त किया जाए। धर्मांतरित लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाने के लिए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की जाए। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम उपायुक्त को मांग पत्र सौंपने वालों में सुरेश उरांव, रामानंद यादव, राजेन्द्र, संतोषचंद्र दास, दीपक वर्मा, हिमांशु सिन्हा आदि शामिल थे।

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  • Web Title:Tribal Security Forum wrote a letter to the President and Prime Minister