Pushpendra Kulshrestha and RSN Singh listened seriously to the internal security seminar - आंतरिक सुरक्षा विषयक गोष्ठी में गंभीरता से सुने गये पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ और आरएसएन सिंह DA Image
13 नबम्बर, 2019|6:44|IST

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आंतरिक सुरक्षा विषयक गोष्ठी में गंभीरता से सुने गये पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ और आरएसएन सिंह

आंतरिक सुरक्षा विषयक गोष्ठी में गंभीरता से सुने गये पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ और आरएसएन सिंह

आंतरिक सुरक्षा विषयक विशेष गोष्ठी में रविवार को पलामू के करीब 500 लोगों ने शांत भाव से करीब तीन घंटे राष्ट्रीय स्तर के वक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और रॉ के पूर्व अधिकारी आरएसएन सिंह को सुना। बाद में अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए करीब दो दर्जन श्रोताओं के सवालों का भी श्री कुलश्रेष्ठ और श्री सिंह ने जवाब दिया और कहा कि राष्ट्र के सशक्ति के लिए सभी को अपने-अपने जगह से अपने-अपने संसाधन से काम करने की जरूरत है। इसी से आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी। स्व. राजीव पांडेय विचार मंच सह खुला मंच ह्वाट्सएप ग्रूप के तत्वावधान में मेदिनीनगर के बैरिया मुहल्ले में स्थित चंद्रा रेजिडेंसी के हॉल में डूबते सूरज की किरणें सीधे मंच पर पहुंच रही थी और ठीक उसी वक्त श्री कुलश्रेष्ठ भारत के आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरे बने हुए तत्वों को सुक्ष्मता से पलामू के श्रोताओं जिसमें अधिकांश युवा और अधेड़ थे, को समझा रहे थे। उन्होंने कहा कि उनका अफसोस 1947 के बाद शुरू होता है क्योंकि उसके पहले विदेशियों ने भारत को जितना बर्बाद किया था किया परंतु 1947 के बाद देश के पुनर्निर्माण की जिम्मेवारी हमलोगों की थी, परंतु दायित्व का निर्वहन नहीं किया जा सका। परंतु सरकार की अपनी मजबूती और बाध्यताएं होती है, यही कारण है कि वे भी सरकार पर कम बोलते हैं। परंतु समाज को जगाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते। समाज ही सरकार को बैठाता और उतारता है। 2014 में सरकार ने बड़ा निर्णय लिया और हर 70 दिन में कोई बड़ा निर्णय हो रहा है। इस जागृति को अब बनाये रखने की जरूरत है। उन्होंने आदर्श के लिए रामायण और चुनौती के लिए महाभारत का अनुशरण करने की सीख दी। दीप प्रज्ज्वलन और स्व. राजीव पांडेय को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पहले वक्ता के रूप में रॉ के पूर्व अधिकारी डॉ. आरएसएन सिंह ने भारतीय संस्कृति, ब्राह्मण कौन? और उनका दायित्व, राजधर्म आदि की चर्चा करते हुए कहा कि हिन्दुस्तान के हालात तेजी से बदल रहे हैं। भारत में वे क्रांति को महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजधर्म निभाने में कुर्बानी देनी पड़ती है जो भगवान श्रीराम की कथा में साफ दिखता है। राजधर्म के लिए हर व्यक्ति को कुर्बानी देनी पड़ेगी। आयोजन में मंच के अध्यक्ष आनंद सिंह, महासचिव रजनीश सिंह, अरविंद गुप्ता, नवीन तिवारी, ललन सिन्हा, विनित कुमार सिंह, ,मुकेश तिवारी, विशाल सिंह, बब्लू चावला, राकेश पांडेय, रिशू अग्रवाल, पदमाकर वर्मा, कमलेश सिंह सहित पूरी टीम सक्रिय रही।

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