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मनरेगा से तीन माह पूर्व बनाये गये सैंकड़ों गाय शेड की राशि का भुगतान लंबित

मनरेगा कानून में ससमय मजदूरी भुगतान के प्रावधान की छतरपुर में धज्जियां उड़ रही हैं । दो से तीन माह छतरपुर प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा से बनवाये गए दो सौ से अधिक गाय शेड योजना में जहां कुशल और अकुशल श्रमिकों का मजदूरी भुगतान नहीं किया गया है, वहीं संबद्ध योजनाओं में सामग्री की राशि का भुगतान भी नहीं किया गया है । स्थिति यह है कि अब मनरेगा के नाम पर न तो कोई मजदूर मिल रहा है, न मिस्त्री । मनरेगा की योजनाओं में सामग्री देने को तो कोई तैयार है ही नहीं ।वास्तविक से कम दर है मजदूरी की : छतरपुर प्रखंड क्षेत्र में अकुशल मजदूरों की दिहाड़ी ढाई सौ रूपया है । मनरेगा में यह 178 रूपया है । मनरेगा की योजनाओं में भी मजदूर ढाई सौ प्रतिदिन लेकर ही मजदूरी कर रहे हैं । राशि के अंतर को पाटने के लिए योजनाओं की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है ।बीडीओ रामरतन वर्णवाल ने कहा कि सामग्री का भुगतान अगले दो तीन माह तक संभव नहीं है । क्योंकि मजदूरी और मेटेरियल का रेसियो गड़बड़ हो गया है । अंतर को पाटने में वक्त लगेगा । अधिकारियों के पास इस सवाल का जवाब है ही नहीं कि योजना लेते वक्त अधिकारियों ने मनरेगा की गाइड लाईन का पालन क्यों नहीं किया ? फिलहाल, अधिकारियों की गलती की सजा लाभुक, दुकानदार और मजदूर भुगत रहे हैं ।

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  • Web Title:Pending payment of cow shed amount