पलामू में उपलब्ध पांडुलिपि विरासत के सर्वेक्षण व संरक्षण लिए टीम गठित
पलामू में ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपि विरासत के सर्वेक्षण, अभिलेखीकरण, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण कार्य के लिए 13 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक में पांडुलिपियों की उपलब्धता पर चर्चा की गई। समिति को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

मेदिनीनगर, प्रतिनिधि। पलामू में ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपि विरासत के सर्वेक्षण, अभिलेखीकरण, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण कार्य के लिए स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है।
कमेटी का गठन
जिला स्तरीय टीम जिले में पांडुलिपि की खोज कर अभिलेखीकरण, संरक्षण और डिजिटलीकरण कार्य करेगी। इसके लिए पलामू उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक भी हो चुकी है। जिला स्तर पर 13 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस टीम के अध्यक्ष उपायुक्त स्वयं हैं। इसके अलावे जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी को सदस्य बनाया गया है। वहीं जिला खेल पदाधिकारी सह जिला संस्कृति नोडल पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी, सदस्य के रूप में जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी,जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सभी संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी को सदस्य बनाया गया है।
विशेषज्ञों की भूमिका
इसके अलावे छह लोगों को आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। आमंत्रित सदस्यों में इतिहास एवं पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ अंगद किशोर, माटी कला बोर्ड के अविनाश देव, आरके प्लस-2 हाई स्कूल लेस्लीगंज के इतिहास शिक्षक अजय कुमार, बीएन कॉलेज के इतिहास विषय के अध्यापक/ व्याख्याता संजीत कुमार, जेएस कॉलेज के इतिहास विभाग के व्याख्याता रवि कुमार, जीएलए कॉलेज के इतिहास विभाग के व्याख्याता राजेंद्र प्रसाद सिंह को शामिल किया गया है। उपायुक्त की अध्यक्षता में 28 अप्रैल को आयोजित बैठक में विशेषज्ञों से जिले में उपलब्ध पांडुलिपि की उपलब्धता के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई है।
आवश्यक कार्रवाई का निर्देश
समिति के सभी सदस्यों को भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय के माध्यम से ज्ञान भारतम मिशन अंतर्गत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, अभिलेखीकरण, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। उपायुक्त ने संबंधित कार्यो का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने का निर्देश दिया है। सदस्यों को बताया गया है कि पलामू जिला अंतर्गत वर्तमान में राजा मेदिनीराय के वंशज मौजूद है,जिनके पास भी पांडुलिपक से संबंधित अभिलेख मिल सकता है। जिला सूचना जनसंपर्क पदाधिकारी को इसके प्रचार-प्रसार की जिम्मेवारी दी गई हैं। वहीं जिला खेल पदाधिकारी को राजा मेदिनीराय के वंशज से संपर्क स्थापित कर पांडुलिपक से संबंधित जानकारी प्राप्त करने का निर्देश दिया गया है।
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