निपाह वायरस को लेकर पलामू के अस्पतालों में बेड आरक्षित
मेदिनीनगर में निपाह वायरस के लिए पलामू के अस्पतालों में 35 बेड आरक्षित किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस वायरस से निपटने की तैयारी पूरी कर ली है। फिलहाल झारखंड में कोई मामला नहीं है, लेकिन सावधानी, स्वच्छता और इम्युनिटी के माध्यम से बचाव की सलाह दी गई है।

मेदिनीनगर, प्रतिनिधि। निपाह वायरस को लेकर पलामू के अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड आरक्षित किया गया है। एमआरएमसीएच में 20, अनुमंडलीय अस्पतालों में 10 और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 5 बेड आरक्षित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने वायरस से निपटने की तैयारी पूरा कर लिया है। सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने शनिवार को प्रेस-प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कहा कि फिलवक्त झारखंड में निपाह वायरस का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। इसी कारण आरक्षित बेड का उपयोग अन्य मरीजों के इलाज में किया जा रहा है। सिविल सर्जन ने कहा कि सावधानी, स्वच्छता और मजबूत इम्युनिटी के जरिए इससे बचाव संभव है।
खान-पान में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह देते हुए उन्होंने बाहरी व खुले में रखे खाद्य पदार्थों से परहेज करने, फलों को अच्छी तरह धोकर खाने और कच्चे या गिरे हुए फलों का सेवन न करने का सलाह दिया। फिलहाल ताड़ और खजूर न खाने की सलाह दिया। उन्होंने बताया कि निपाह वायरस के फैलने का प्रमुख स्रोत चमगादड़ माने जाते हैं। चमगादड़ों के यूरिन या लार से संक्रमित फलों के माध्यम से इंसानों तक पहुंच सकता है। खांसी और छींक के जरिए भी फैल सकता है। उन्होंने कहा कि निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण, तेज बुखार, असहनीय सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी हैं। स्थिति बिगड़ने पर मस्तिष्क में सूजन (इंसेफ्लाइटिस), बेहोशी या कोमा तक की नौबत आ सकती है। ऐसे में तेज सिरदर्द या सांस की तकलीफ बढ़ने पर तुरंत जांच कराना जरूरी है। खांसी और छींक के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है। उन्होंने कहा कि निपाह वायरस का कोई विशेष इलाज फिलहाल उपलब्ध नहीं है। मरीजों का उपचार सपोर्टिव केयर के आधार पर किया जाता है। जांच के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट किया जाता है। मौके पर जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. अनूप कुमार सिंह मौजूद रहे।

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