
जीएलए कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ने संभाला कार्यभार, कई चुनौतियां सामने
डॉ राकेश कुमार ने शनिवार को गणेश लाल अग्रवाल कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं में उपस्थित रहने के लिए प्रेरित करने का वादा किया। कॉलेज में छात्र-छात्राओं की बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। नए प्राचार्य से समस्याओं के समाधान की उम्मीद की गई है।
मेदिनीनगर, प्रतिनिधि। नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के प्रिमियर संस्थान गणेश लाल अग्रवाल कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य के रूप में डॉ राकेश कुमार ने शनिवार को कार्यभार संभाल लिया। प्रभारी प्राचार्य ने कहा कि विद्यार्थी कैंपस से जुड़े और नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित हों, इसके लिए विद्यार्थियों को मोटिवेट किया जाएगा। जो भी संसाधन उपलब्ध है, उसका समुचित उपयोग विद्यार्थियों के हित में किया जाएगा। शिक्षक और कर्मचारी समय से कॉलेज आएं इसपर भी उनका ध्यान रहेगा, ताकि विद्यार्थियों की कक्षा और और गैर शैक्षणिक कार्य प्रभावित नहीं हो। आने वाले दिनों में विद्यार्थियों के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य किया जाएगा।

स्नातकोत्तर शिक्षक संघ ने शनिवार को नए प्रभारी प्राचार्य डॉ राकेश कुमार को योगदान देने के बाद स्वागत किया। शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ आरके झा एवं सचिव राजेन्द्र कुमार सिंह ने नए प्रभारी प्राचार्य के नेतृत्व में कॉलेज में शैक्षणिक वातावरण को और सशक्त, अनुशासित एवं शोधमुखी बनाने की आशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डॉ राकेश कुमार एक अनुशासित, कर्मठ और विद्यार्थियों के हित में कार्य करने वाले शिक्षाविद् हैं। इस अवसर पर डॉ दिलीप कुमार, डॉ गजेंद्र सिंह, डॉ श्रवण कुमार, डॉ जसबीर बग्गा, डॉ अवध किशोर पांडेय, डॉ शैलेश मिश्रा, डॉ कुरूतूलाह, डॉ रविशंकर सिंह, डॉ भीम राम, डॉ राघवेंद्र कुमार सिंह, डॉ प्रदीप कुमार,डॉ नीतू कुमारी, डॉ संजय बाड़ा समेत कई शिक्षक शामिल थे। जीएलए कॉलेज की शिक्षा के क्षेत्र में अपनी ऐतिहासिक पहचान है, परंतु बीच के कालखंडों में शैक्षणिक वातावरण समाप्त हो जाने के कारण इसकी पहचालन धूमिल हो गई है। कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी घोर अभाव है। छात्र-छात्राओं को बैठने के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। शत-प्रतिशत छात्राएं नियमित क्लास में पहुंचने लगे तो बैठने की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। वर्ग कक्षों में पर्याप्त रौशनी, पंखे, बिजली की निर्वाध आपूर्ति भी नहीं हो पाती है। शौचालयों की सफाई की हालत काफी खराब है। विद्यार्थियों को सुसज्जित शैक्षणिक माहौल नहीं मिलने के कारण नामांकित विद्यार्थी पढ़ाई करने के लिए कॉलेज आना भी पसंद नहीं करते हैं। कॉलेज में नामांकन, परीक्षा फार्म भरने के समय विद्यार्थियों की भीड़ होती है। छात्राओं के लिए सेमिनार, वर्कशॉप, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शोध गतिविधियां भी थम सी गई है। विद्यार्थियों ने नए प्रभारी प्राचार्य से उम्मीद जताई है कि समस्याओं के निदान की दिशा में ठोस कदम उठाएगें। नए प्रभारी प्राचार्य को प्रशासनिक अनुभव काफी लंबा है। वे लंबे समय तक नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में डीएसडब्ल्यू और रजिस्ट्रार के पद पर कार्य कर चुके हैं।

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