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8 अगस्त, 2020|11:55|IST

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रचनाओं पर चर्चा करते हुए याद किये गये मुंशी प्रेमचंद

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इप्टा की पलामू यूनिट ने विभिन्न सेक्टर के कर्मयोगियों को अपने कार्यालय में आमंत्रित कर मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं की चर्चा की और इस माध्यम से उन्हें याद करने का प्रयास किया। इस क्रम में कई वक्ता वर्चुअल माध्यम से भी 20 दिनों के अभियान में शामिल हुए। 31 जुलाई को मुंशी प्रेमचंद की जयंती के मौके पर आयोजित समापन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य किसानों, स्त्रियों के दर्द, ब्रिटिश शासकों व जमींदारों के अत्याचार तथा संघर्ष के नायकों का प्रतिनिधित्व करता है। प्रेमचंद के साहित्य आज भी प्रासंगिक है। उनके एक कहानी के पात्र आज भी जीवित है। प्रेमचंद की कहानियां कॉर्पोरेट जगत के विकास की ओर इशारा करती है। आज कॉर्पोरेट जगत और पूंजीवादी शक्तियों के संजाल में पूरा मानव समाज घिर चुका है। इन परिस्थितियों में अगर प्रेमचंद होते तो पूंजीवादी शक्ति के खिलाफ जनता को एकजुट कर रहे होते और संभव है उन्हें भी अवतार सिंह पाश, मयमन सिंह, सफदर हाशमी, गोविंद पानसरे, नरेंद्र दाभोलकर, गौरी लंकेश, वरवर राव, तेल तुमड़े जैसे लोगों की भांति प्रतिरोध का सामना करना पड़ता। समापन समारोह में कथाकार पंकज मित्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ कुमार वीरेंद्र, जमशेदपुर इप्टा के रंगकर्मी अर्पिता ने शिरकत की। समापन कार्यक्रम की शुरुआत इप्टा के रंगकर्मी कुलदीप सिंह और उनके साथियों ने हम मेहनतकश जग वालों...गीत से की। 12 जुलाई से 31 जुलाई तक चले अभियान में उपेंद्र मिश्र, केडी सिंह, नंदलाल सिंह, विनोद कुमार, शैलेंद्र कुमार, सतीश कुमार तिवारी, प्रोफेसर केडी ओझा, डॉक्टर राजेश वागीशा, व्यास सिंह, गोकुल बसंत, शिव शंकर प्रसाद, सतीश सुमन, प्रोफेसर एससी मिश्रा, अरविंद कुमार सिंह, शब्बीर अहमद, दिव्या भगत आदि ने विषय पर चर्चा में हिस्सा लिया। प्रेमचंद द्वारा लिखित 19 कहानियों का भी पाठ किया गया। उपेंद्र मिश्रा, प्रेम प्रकाश, रविशंकर, अपर्णा पांडे, राजेश पांडे, तीजू भगत, स्मृति लाल, रोनक अफरोज, मोहम्मद हमीद, श्रीहर्ष, अनुभव मिश्रा, एमजे अजहर, अमीन रहबर, धीरेंद्र कुमार, संजीत कुमार, शालिनी, राम-श्याम व भूपेश कुमार शर्मा आदि भी विभिन्न माध्यम से अभियान का हिस्सा बने।

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  • Web Title:Munshi Premchand remembered while discussing compositions