राशि वापस नहीं करने पर 22 स्कूलों के प्रभारी हेडमास्टर सह सचिव पर होगा एफआईआर
मेदिनीनगर, प्रतिनिधि। पलामू जिले के 22 न्यू प्राथमिक विद्यालय और उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रभारी हेडमास्टर सह सचिव एक सप्ताह के अंदर राशि वापस नहीं

मेदिनीनगर, प्रतिनिधि। पलामू जिले के 22 न्यू प्राथमिक विद्यालय और उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रभारी हेडमास्टर सह सचिव को एक सप्ताह के अंदर राशि वापस नहीं करने की चेतावनी दी गई है। ऐसा नहीं करने पर एफआईआर कराया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2008-2009 से लेकर 2012-2013 में तीन अतिरिक्त वर्ग और कुछ स्कूलों में शौचालय बनाने के लिए सर्वशिक्षा अभियान (अब समग्र शिक्षा अभियान) से राशि दी गई थी, परंतु अभी भी 77 लाख रुपए अबतक असमायोजित है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अधिकांश स्कूलों के प्रभारी हेडमास्टर सह सचिव और ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष ने पूरी राशि की निकासी कर ली है, परंतु अभी तक न तो अतिरिक्त वर्ग कक्ष पूरा हो सका है और न ही शौचालय का निर्माण पूर्ण हुआ है।
कुछ हेडमास्टर सह सचिव ने पूरी राशि की निकासी कर कुछ भी काम नहीं कराया है। आज की तिथि में भी इन स्कूलों को उपलब्ध कराई गई राशि का समयोजन लंबित है।जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सौरभ प्रकाश ने तत्काल प्रभाव से सभी प्रभारी हेडमास्टर सह सचिव के मानदेय पर रोक लगा दिया है और प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि संबंधित प्रभारी हेडमास्टर सह सचिव का मानदेय जब तक विमुक्त नहीं किया जाएगा जब तक कि वे बकाया राशि जमा नहीं का साक्ष्य/रसीद जिला कार्यालय में प्रस्तुत नहीं देते हैं। उन्होंने कहा है कि अगर संबंधित हेडमास्टर सह सचिव सात दिनों के अंदर बकाया राशि वापस नहीं करेंगें तो वैसे प्रभारी हेडमास्टर सह सचिव के विरूद्ध प्राथमिकी एवं ठोस कार्रवाई की जाएगी। डीइओ ने पत्र में उल्लेख किया है कि झारखंड शिक्षा परियोजना-पलामू अंतर्गत विभिन्न असैनिक निर्माण योजनाओं के लिए विद्यालयों को अग्रिम राशि उपलब्ध करायी गई थी। समीक्षा के क्रम में पाया गया है कि पर्याप्त समय बीत जाने के बाद भी इन विद्यालयों द्वारा न तो कार्य पूर्ण किया गया है और नही अवशेष राशि कार्यालय में वापस की गई है। तकनीकी प्रभाग प्रभारी ने रिकवरी के लिए बार-बार निर्देश दिए बावजूद इसके प्रभारी हेडमास्टर सह सचिवों ने सरकारी राशि को अपने पास लंबित रखा गया है। यह स्वेच्छाचारिता सरकारी धन के दुरूपयोग एवं विभागीय आदेशों का अवहेलना को प्रदर्शित करती है।
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