एसएनसीयू में भर्ती होने वाले बच्चों में 9 प्रतिशत बच्चों की हुई मौत
मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एसएनसीयू में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 9 प्रतिशत बच्चों की मौत हुई। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक 1595 बच्चे भर्ती हुए, जिनमें से 140 की मौत हो गई। डॉ भारद्वाज चौधरी ने बताया कि अधिकांश मौतें बाहर से आने वाले प्री मैच्योर बच्चों की हैं।

मेदिनीनगर, प्रतिनिधि। मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एमआरएमसीएच) के एसएनसीयू में वित्तीय वर्ष 2025- 26 में भर्ती होने वाले करीब 9 प्रतिशत बच्चों की मौत हो गई । वित्तीय वर्ष में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक 1595 बच्चे भर्ती हुए, पूरी तरह ठीक होने के बाद 910 बच्चे डिस्चार्ज हुए, अभिभावक अपनी मर्जी से 247 बच्चों को ईलाज के बीच में ही ले गए,298 बच्चों को रेफर किया गया साथ ही इस दौरान 140 बच्चों की मौत हो गई। एसएनसीयू प्रभारी डॉ भारद्वाज चौधरी ने कहा कि पलामू गढ़वा लातेहार का सबसे बड़ा अस्पताल होंने के बहुत सारे बच्चे बाहर से आकर भर्ती होते है। सबसे अधिक मृत्यु बाहर से आने वाले बच्चों की होती है। एमआरएमसीएच में जन्म लेने वाले बच्चे का मृत्यु प्रतिशत बहुत कम है। उन्होंने कहा कि पीएचसी, सीएचसी से छ ,सात महीने वाले अधिकतर प्री मैच्योर बच्चे यहां एसएनसीयू में भर्ती होते है। कम मानव संसाधन, अत्याधुनिक मशीनों के कमी से मृत्यु दर प्रभावित होती है।
समस्याएँ और समाधान
उन्होंने कहा कि एसएनसीयू का एक अपना लैब होना चाहिए। वर्तमान समय में सीबीसी सहित अन्य जांच मरीज को बाहर कराना पड़ता है। अस्पताल के अंदर सुविधाएं होने से मरीजों के साथ डॉक्टर भी तत्काल रिपोर्ट देखकर उसके अनुरूप ईलाज कर सकेंगे।
अवश्यक संसाधन
पूर्व प्रभारी डॉ गौरव विशाल ने कहा कि 40 बेड के एसएनसीयू के लिए करीब 16 जीएनएम चाहिए मगर वर्तमान में केवल 9 जीएनएम मौजूद है । क्रिटिकल बच्चों को बेहतर देखभाल के लिए 4 वेंटिलेटर चाहिए। पहले एक था भी मगर अब उपयोग के लायक नहीं है । वेंटिलेटर की कमी के कारण ही अधिकतर बच्चे यहां से रेफर होते है। कम वजन के बच्चों के बेहतर देखभाल के लिए चार सी टैप की नितान्त आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एसएनसीयू में अत्याधुनिक मशीन और उपकरण मौजूद होना चाहिए ,जिसका अभाव है। उल्लेखनीय है कि कैलेंडर वर्ष 2024 में भी एसएनसीयू में 150 नवजात बच्चों की मौत हुई थी । करीब एक वर्ष बीत जाने के बाद भी आमूलचूल सुधार नहीं हुआ है।
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