गुरुद्वारा में मनाई गई श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहीदी दिवस
मेदिनीनगर में सिख धर्म के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस बेलवाटिका स्थित गुरुद्वारा में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में सुखमनी साहिब का पाठ और शबद-कीर्तन हुआ। गुरुजी के बलिदान और आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं ने लंगर का प्रसाद ग्रहण किया।

मेदिनीनगर, प्रतिनिधि। सिख धर्म के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस मंगलवार को शहर के बेलवाटिका स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंघ सभा में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। गुरुद्वारा में विशेष दीवान सजाकर सिख समाज के महिला-पुरुषों और बच्चों ने अरदास की। कार्यक्रम की शुरुआत सुखमनी साहिब के पाठ के साथ हुआ। स्थानीय रागी जत्था ने मधुर शबद-कीर्तन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। श्री गुरु सिंह सभा कमेटी के प्रधान सतवीर सिंह राजा ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, आदर्शों और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने 1665 से 1675 तक सिख समुदाय का मार्गदर्शन किया।
उनका जीवन शांत स्वभाव, अध्यात्मिकता, निडरता और परोपकार की मिसाल है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन शासक औरंगजेब के अत्याचार के विरोध करने के कारण 1675 में इसी दिन गुरुजी ने अपने प्राणों की आहुति दी। उनका शहीदी दिवस न्याय, मानवाधिकार और धर्म की रक्षा के लिए खड़े होने का संदेश देता है। कार्यक्रम के समापन के बाद गुरुद्वारा में गुरु का लंगर शुरू हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मौके पर ज्ञानी सुंदर सिंह, जनरैल सिंह, राजपाल सिंह, राजेंद्र सिंह बंटी, भूपेंद्र सिंह चावला, राजेंद्र कौर, जसमीत कौर, रविंदर कौर, हनी कौर, परविंदर कौर आदि सक्रिय रहे।

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