Pakur News: जनप्रतिनिधियों व प्रशासन की उपेक्षा से तंग ग्रामीणों ने दिखाया अपनी एकता का बल
Pakur News: महेशपुर के कुलबुना गांव में ग्रामीणों ने खुद ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया। 24 वर्षों से जर्जर सड़क के कारण वे परेशान थे और जनप्रतिनिधियों से मदद नहीं मिल रही थी। अंततः उन्होंने चंदा इकट्ठा कर मरम्मत का कार्य किया और अधिकारियों से स्थायी समाधान की मांग की।

Pakur News: महेशपुर, एक संवाददाता। प्रखंड के कुलबुना गांव में लंबे समय से विकास की बाट जोह रहे ग्रामीणों ने आखिरकार खुद ही अपनी समस्या का समाधान करने की पहल की। ग्रामीणों ने शनिवार को आपस में चंदा इकट्ठा कर श्रमदान करते हुए सड़क का निर्माण किया। गांव तक पहुंचने वाली सड़क पिछले करीब 24 वर्षों से जर्जर है। सड़क निर्माण व मरम्मत को लेकर ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों तक गुहार लगाई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद सड़क की हालत जस की तस बनी रही। जर्जर सड़क के कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीण सुदाम माल, काजल मंडल, खोकन पहाड़िया, अचिन पहाड़िया, रवि पहाड़िया, सूरज पहाड़िया, मदन पहाड़िया, मिलन पहाड़िया, सुनील पहाड़िया, दिलीप लेट समेत सैकड़ो ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और कीचड़ जमा होने से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहनों के आवागमन में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने के कारण बीमार लोगों, बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल व अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में काफी दिक्कत होती है।
जब जिम्मेदारों ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने उठाया बीड़ा...
लगातार उपेक्षा से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार आपस में चंदा इकट्ठा किया और सड़क की मरम्मत का काम खुद शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने अपने स्तर से जरूरी सामग्री की व्यवस्था कर जर्जर हिस्सों में मरम्मत कराई। ग्रामीणों की इस पहल से साफ है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग के बावजूद जब सरकारी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो लोगों को मजबूर होकर अपनी समस्या का समाधान खुद करना पड़ा। ग्रामीणों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों तक कई बार सड़क की स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन किसी ने गंभीरता से पहल नहीं की। चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन गांव की बुनियादी समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है ग्रामीणों में रोष, स्थायी समाधान की मांग सड़क की मरम्मत ग्रामीणों ने भले ही अपने स्तर से करा दी हो, लेकिन उनका कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से सड़क का स्थायी निर्माण कराने की मांग की है, ताकि आने वाले वर्षों में उन्हें दोबारा ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी बुनियादी सुविधा है। 24 वर्षों से सड़क निर्माण का इंतजार कर रहे ग्रामीणों की ओर से खुद चंदा जुटाकर मरम्मत कराया जाना व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी पहल के बाद संबंधित विभाग इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सड़क का स्थायी निर्माण कराएगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचायत के मुखिया के द्वारा गांव में हमेशा पक्षपात किया जाता है। ग्रामीणों ने कई बार मुखिया से सड़क निर्माण के लिए सहायता एवं गुहार लगाया परंतु मुखिया के द्वारा ग्रामीणों को डांट कर भगा दिए जाने का भी आरोप लगाया है।


