रात में ट्रैक्टरों के लगातार परिचालन का विरोध, देर रात ग्रामीणों ने किया हंगामा
पाकुड़ के चांदपुर गांव में ग्रामीणों ने रात के समय गिट्टी लदे ट्रैक्टरों के लगातार परिचालन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इससे गांव में तनावपूर्ण माहौल बना। ग्रामीणों ने कहा कि ट्रैक्टरों की आवाजाही से नींद में खलल और संभावित हादसों का डर है। प्रशासन से रात में भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने की मांग की गई।

पाकुड़। चांदपुर गांव के ग्रामीण रास्ते से देर रात भारी वाहनों, खासकर गिट्टी लदे ट्रैक्टरों के लगातार परिचालन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। बुधवार की रात के समय ट्रैक्टरों की आवाजाही से परेशान ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिससे कुछ देर के लिए गांव में तनावपूर्ण माहौल बन गया। ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन रात के समय बड़ी संख्या में गिट्टी लदे ट्रैक्टर गांव की सड़कों से गुजरते हैं। इससे नींद में खलल, धूल-धक्कड़ और संभावित हादसों का भय बना रहता है। इसके अलावे रास्तों पर काफी गिट्टी के टुकड़े भी गिरे रहते हैं। जिससे बाइक चालकों को काफी परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिदिन बिना माइनिंग के गिट्टी लदे ट्रैक्टर जिसमें अधिकांश बिना नंबर प्लेट के होते हैं मुख्य सड़क से न जा कर गांव के रास्ते चलते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बिना माइनिंग के ट्रैक्टर मणिरामपुर, नया चांदपुर के रास्ते चांदपुर पहुंचते हैं और यहां से बंगाल निकल जाते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहले भी कई बार इस समस्या को लेकर आपत्ति जताई जा चुकी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उन्हें सड़क पर उतरकर ट्रैक्टरों को रोकना पड़ा। विरोध के दौरान गिट्टी लदे कई ट्रैक्टरों को आगे बढ़ने नहीं दिया गया। इस दौरान ट्रैक्टर चालकों, वाहन मालिकों और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो कुछ देर तक हंगामे में तब्दील हो गई। ग्रामीणों का कहना था कि रात में ट्रैक्टरों का परिचालन पूरी तरह से अनुचित है और इससे बच्चों, बुजुर्गों सहित पूरे गांव को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार लोगों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। आश्वासन के बाद स्थिति धीरे-धीरे शांत हुई। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि रात में भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई जाए और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन ग्रामीणों में अब भी नाराजगी बनी हुई है।

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