आलू को नहीं मिल रहा बाजार में उचित मूल्य
महेशपुर प्रखंड में आलू किसानों को इस वर्ष भारी घाटा हो रहा है। आलू की कीमतें 300-400 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गई हैं, जबकि लागत बढ़कर 25-30 हजार रुपये प्रति बीघा हो गई है। इसके चलते किसान मजबूरी में 3 रुपये प्रति किलो पर आलू बेचने को मजबूर हैं। उचित बाजार नहीं मिलने से आर्थिक संकट बढ़ रहा है।

महेशपुर। महेशपुर प्रखंड क्षेत्र में इस वर्ष आलू किसानों के लिए भारी घाटे का सौदा साबित हो रहा है। नुड़ाई गांव समेत आसपास के क्षेत्रों में किसानों के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही है। मेहनत और लागत बढ़ने के बावजूद बाजार में आलू की कीमत इतनी गिर गई है कि किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम में बेचने की मजबूरी बन गई है। नुड़ाई गांव के किसानों ने बताया कि वर्तमान में आलू का बाजार भाव महज 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। यह स्थिति किसानों को आर्थिक संकट में धकेल रही है। कई किसान 3 रुपये प्रति किलो की दर से भी आलू बेचने को मजबूर हैं।
बावजूद इसके खरीदार नहीं मिल रहे हैं। किसानों के अनुसार पिछले वर्ष आलू का भाव करीब 800 रुपये प्रति क्विंटल था, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा होता था। लेकिन इस बार कीमत आधे से भी कम हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि एक बीघा जमीन पर आलू की खेती में इस वर्ष 25 से 30 हजार रुपये तक खर्च आया है। जिसका मुख्य कारण कीटनाशक और रासायनिक दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी है। वहीं जुताई का खर्च 960 रुपये प्रति घंटा से बढ़कर 1300 रुपये हो चुका है। वहीं पिछले वर्ष के मुकाबले मजदूरी 300 से बढ़कर 400 रुपये हो चुकी है। इन सब कारणों से लागत बढ़ी है, लेकिन बाजार भाव गिरने से किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही है। स्थानीय किसानों के मुताबिक नुड़ाई गांव में करीब 90 बीघा जमीन पर आलू की खेती होती है। जहां प्रति बीघा लगभग 30 क्विंटल उत्पादन आसानी से हो जाता है । इस अनुपात से नुड़ाई में लगभग उत्पादन 2700 क्विंटल हुई है । इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन होने के बावजूद उचित बाजार नहीं मिलने से किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। महेशपुर प्रखंड में सरकारी कोल्ड स्टोरेज नहीं होने के कारण किसान अपनी उपज सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं। मजबूरी में उन्हें कम कीमत पर आलू बेचना पड़ रहा है। हालांकि कुछ किसान निजी कोल्ड स्टोरेज शिवसिंधु स्टोरेज सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड सीमपुर में आलू रख रहे हैं। जहां प्रति क्विंटल 220 रुपए शुल्क देकर 8 महीने तक भंडारण किया जा सकता है। लेकिन यह सुविधा सभी किसानों के लिए सुलभ नहीं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस स्टोरेज में किसान अपने आलू, महुआ, गुड़ एवं दलहन की फसले रख सकते हैं। परंतु किसान को अपनी बोरी में ही भर के सामान देना है।
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