
प्रकृति विहार पार्क का अस्तित्व खतरे में, जर्जर हो गए मनोरंजक सामान
अमड़ापाड़ा, एक संवाददाता। प्रकृति विहार पार्क का अस्तित्व खतरे में, जर्जर हो गए मनोरंजक सामान प्रकृति विहार पार्क का अस्तित्व खतरे में, जर्जर हो गए
प्रकृति विहार पार्क का अस्तित्व खतरे में, जर्जर हो गए मनोरंजक सामान अमड़ापाड़ा, एक संवाददाता। प्रखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल प्रकृति विहार पार्क प्रशासनिक उपेक्षा और संबंधित कंपनी की लापरवाही के चलते बदहाली की ओर बढ़ता जा रहा है। जिला प्रशासन और वेस्ट बंगाल पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डब्ल्यूबीपीडीसीएल) की उदासीनता के कारण पार्क आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। पार्क का संचालन कर रहे मंटू भगत ने बताया कि नववर्ष के अवसर पर उनके स्तर से पार्क में लगे पेड़ों और छोटी-छोटी क्यारियों की रंग-रोगन कर सजावट की गई, ताकि आने वाले पर्यटकों को कुछ राहत मिल सके। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बीते लगभग दो वर्षों से डब्ल्यूबीपीडीसीएल ने सीएसआर के तहत प्रकृति विहार पार्क को गोद ले रखा है, बावजूद इसके पार्क के समुचित जीर्णोद्धार की दिशा में कंपनी द्वारा अब तक कोई ठोस कार्य नहीं किया गया है।
पार्क में स्थायी प्रकाश व्यवस्था के अभाव में शाम होते ही अंधेरा छा जाता है, जिससे पर्यटक यहां रुकने से कतराते हैं। झाड़ियों की अधिकता और प्रकाश की कमी के कारण असामाजिक गतिविधियों की आशंका भी बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पार्क की सुध नहीं ली गई तो यह पर्यटन स्थल पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो जाएगा। मंटू भगत के अनुसार पार्क के भीतर स्थित सरोवर के आसपास कई वर्षों से बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं, जिन्हें आज तक साफ नहीं कराया गया है। इससे न केवल पार्क की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्क में बच्चों के खेलने के लिए किसी भी प्रकार के आधुनिक झूले या मनोरंजन के साधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे स्थानीय लोग और सैलानी निराश लौटने को मजबूर हैं। पार्क के अंदर बने हवा महल की स्थिति भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है। हवा महल की छत से सीमेंट झड़ चुका है और लोहे का सरिया बाहर निकल आया है। वहीं सुरक्षा के लिए बनाए गए घेरे भी कई जगहों से टूट चुके हैं, जिससे कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद संबंधित विभागों और कंपनी की ओर से मरम्मत को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है। प्रकृति विहार पार्क बांसलोई नदी के तट पर स्थित होने के कारण पर्यटन की अपार संभावनाएं रखता है। यदि पार्क का समुचित विकास किया जाए तो यह क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार और सरकारी राजस्व में भी वृद्धि कर सकता है। अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और डब्ल्यूबीपीडीसीएल गंभीरता दिखाते हुए पार्क के जीर्णोद्धार और विकास के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि प्रकृति विहार पार्क अपनी खोई हुई पहचान और रौनक दोबारा हासिल कर सके। फोटो संख्या-15- पार्क में स्थिति हवा महल की जर्जर स्थिति फोटो संख्या-16- पार्क में बच्चों के मनोरंजक सामान की स्थिति

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