
पाकुड़िया प्रखंड में किसानों के खेतों में जलाई गई पराली
पाकुड़िया प्रखंड में किसान खेतों में पराली जलाने लगे हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ने का खतरा है। ठंड और कोहरे के मौसम में वायु की शुद्धता प्रभावित हो रही है। एक किसान की देखा-देखी अन्य किसान भी पराली जलाने लगे हैं, जिससे पशुओं के लिए चारे की कमी और खेतों की उत्पादकता पर असर पड़ सकता है।
पंजाब, हरियाणा सहित अन्य प्रदेशों की तरह पाकुड़िया प्रखंड में भी खेतों में किसानों द्वारा पराली जलाने का प्रचलन यहां तेजी पकड़ने लगा है। जिससे ठंढ़ और कोहरे के इस मौसम में यहां भी वायु की शुद्धता प्रभावित होती महसूस होने लगी है। एक किसान की देखा देखी दूसरे, तीसरे किसान भी खेतों में ही पराली जलाने लगे हैं। इससे प्रदूषण बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है। साथ ही पशुओं के लिए चारा आदि की भी कमी होने का खतरा मंडराने लगा है। इससे खेतों की उत्पादकता पर भी असर पड़ने की संभावना है। दरअसल इन दिनों समय की बचत, खेतों से धान ढोकर घर लाने की झंझट, मजदूरों के पलायन के फलस्वरूप कामकाजी सहयोगियों की कमी और मशीनीकरण की नई तकनीक से प्रभावित होकर अब किसान भी पंजाब, हरियाणा की नकल करने लगे हैं जिससे अमूनन रात में खेतों में पराली जलती देखना यहां आम बात होने लगी है।

इससे पशुओं के समक्ष पुआल जैसे चारे की कमी संभव है। साथ ही प्रदूषण भी तय मानक को पार कर सकता है। भविष्य में पराली जलाने की एक परम्परा शुरू हो सकती है। जिससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ सकता है। समय रहते संज्ञान में लेना जरूरी है वरना बाद में कहीं देर न हो जाए । फोटो संख्या -05 - पाकुड़िया में खेत में जलती पराली।

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