कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, संयम और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए : प्रीति रामानुज जी
Feb 05, 2026 05:20 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, पाकुड़
महेशपुर के सुंदरपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन राम अवतार और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की भव्य झांकी मनाई गई। अंतरराष्ट्रीय कथावाचिका प्रीति रामानुज जी ने भगवान के आदर्श जीवन का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को प्रेरित किया। कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भक्ति गीत गाए।
महेशपुर, एक संवाददाता। प्रखंड के सुंदरपुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार की रात कथा पंडाल राम अवतार की मर्यादा और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की आनंदमयी झांकी से भक्तिमय हो उठा। अंतरराष्ट्रीय कथावाचिका पूज्य प्रीति रामानुज जी ने अत्यंत ओजस्वी और भावपूर्ण शैली में भगवान राम के आदर्श जीवन तथा श्रीकृष्ण जन्म की दिव्य लीला का विस्तार से वर्णन किया। कथा स्थल पर देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही और पूरा वातावरण जय श्रीराम एवं नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोष से गूंजता रहा। कथावाचिका ने राम अवतार का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लेकर मर्यादा, सत्य, त्याग और कर्तव्य पालन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राम केवल एक राजा नहीं, बल्कि आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श शासक के रूप में मानव जीवन की सर्वोच्च मर्यादाओं के प्रतीक हैं। राम का वनवास, पिता की आज्ञा का पालन, मित्रता में निष्कपटता और रावण वध के माध्यम से धर्म की विजय- ये सभी प्रसंग मानव समाज को सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर राम नाम का संकीर्तन करते रहे। कथावाचिका ने कहा कि राम का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, संयम और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। जहां मर्यादा है, वहीं राम हैं। इसके पश्चात श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया गया। जैसे ही आधी रात के समय भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का वर्णन हुआ, कथा पंडाल उल्लास और भक्तिभाव से झूम उठा। बाल गोपाल की झांकी सजाई गई, शंखनाद और घंटियों की ध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने खड़े होकर भगवान का स्वागत किया। महिलाओं ने मंगलगीत गाए और श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर जन्मोत्सव मनाया।
कथावाचिका ने बताया कि कंस के अत्याचारों से त्रस्त पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए भगवान ने मथुरा की कारागार में देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि यह संदेश है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, अंततः प्रकाश का जन्म अवश्य होता है। कृष्ण की बाल लीलाएं, माखन चोरी, गोकुलवासियों के प्रति स्नेह और आगे चलकर गीता का दिव्य उपदेश- ये सभी प्रसंग मानव जीवन को प्रेम, करुणा और धर्म का मार्ग दिखाते हैं। कथा के दौरान भजन-कीर्तन और झांकी ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। बच्चे कान्हा और राधा के वेश में आकर्षण का केंद्र बने रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान के जन्मोत्सव पर प्रसाद वितरण कर अपनी आस्था प्रकट की।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा आगामी दिनों में भी प्रतिदिन संध्या समय आयोजित की जाएगी, जिसमें भगवान की विभिन्न लीलाओं और आध्यात्मिक संदेशों का विस्तार से वर्णन होगा। बुधवार की रात राम अवतार की मर्यादा और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की आनंदमयी झांकी ने सुंदरपुर को भक्ति और उल्लास की दिव्य आभा से आलोकित कर दिया। श्रद्धालुओं में आगामी प्रसंगों को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
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