भगवान श्रीराम का चरित्र मर्यादा, त्याग और धर्म का प्रतीक : प्रीति रामानुज जी
महेशपुर के सुंदरपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन दिव्य मर्यादा और उद्धव-गोपी संवाद का भावुक वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं ने राम नाम का संकीर्तन किया और रुक्मणी विवाह उत्सव भव्य तरीके से मनाया गया। कथावाचिका ने सच्ची भक्ति और प्रेम की महत्ता को दर्शाया, जिससे वातावरण भक्ति और उल्लास से गूंज उठा।
महेशपुर, एक संवाददाता। प्रखंड के सुंदरपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार की संध्या कथा पंडाल राम पंचाध्यायी की दिव्य मर्यादा, उद्धव-गोपी संवाद की करुण विरह भावनाओं और श्री रुक्मणी विवाह उत्सव की मंगलमयी झांकियों से पूर्णतः भक्तिमय हो उठा। देर रात तक श्रद्धालुओं की काफी भीड़ कथा स्थल पर उमड़ी रही और पूरा वातावरण राधे-राधे, जय श्रीराम तथा रुक्मणी वल्लभ की जय के जयघोष से गुंजायमान रहा। अंतर्राष्ट्रीय कथावाचिका पूज्य प्रीति रामानुज जी ने अत्यंत ओजस्वी एवं भावपूर्ण शैली में राम पंचाध्यायी का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम का चरित्र केवल एक आदर्श राजा का नहीं, बल्कि मर्यादा, त्याग और धर्म के सर्वोच्च मानकों का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि राम कथा हमें जीवन में सत्य, संयम और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देती है। प्रभु श्रीराम का वनगमन, भ्रातृ प्रेम, मातृ-पितृ आज्ञा पालन और प्रजा के प्रति समर्पण आज भी समाज के लिए आदर्श मार्गदर्शन है। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर राम नाम का संकीर्तन करते रहे। इसके पश्चात उद्धव-गोपी संवाद का मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथावाचिका ने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव को गोकुल भेजा, तब गोपियों ने ज्ञान नहीं, बल्कि प्रेम का पाठ पढ़ाया। गोपियों की कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति और विरह वेदना ने पूरे पंडाल को भावुक कर दिया। कथावाचिका ने कहा कि सच्ची भक्ति तर्क और ज्ञान से परे होती है-वह केवल समर्पण और निष्कपट प्रेम की भाषा समझती है। इस प्रसंग के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत हो उठा। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण श्री रुक्मणी विवाह उत्सव रहा। कथा पंडाल को भव्य विवाह मंडप के रूप में सजाया गया था। फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सुसज्जित मंच पर भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल गीतों के बीच विधिवत विवाह उत्सव संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर दिव्य युगल का स्वागत किया और विवाह गीतों पर झूमते हुए अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूरे आयोजन में उल्लास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथावाचिका ने रुक्मणी विवाह की कथा सुनाते हुए बताया कि रुक्मणी जी का अटूट विश्वास और समर्पण ही उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की अर्धांगिनी बनने का सौभाग्य दिलाता है। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि दृढ़ आस्था और सच्चे प्रेम के मार्ग में कोई भी बाधा स्थायी नहीं होती। पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन, शंखध्वनि और घंटियों की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा आगामी दिनों में भी संध्या समय जारी रहेगी, जिसमें भगवान की अन्य दिव्य लीलाओं का वर्णन किया जाएगा। छठे दिन का यह आयोजन सुंदरपुर में आध्यात्मिक चेतना, श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्सव का अनुपम उदाहरण बनकर उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।
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