विवादों के घेरे में सड़क निर्माण कार्य, पर्यावरण नियमों की अनदेखी का आरोप

Newswrap हिन्दुस्तान, पाकुड़
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- संवेदक पर वन विभाग की अनुमति के बिना 50 छोटे-बड़े फलदार व कीमती पेड़ों को उखाड़ने का आरोप... विवादों के घेरे में सड़क निर्माण कार्य, पर्यावरण नियमों

विवादों के घेरे में सड़क निर्माण कार्य, पर्यावरण नियमों की अनदेखी का आरोप

अमड़ापाड़ा, एक संवाददाता। प्रखंड क्षेत्र के पकलो से मरियो मालपहाड़ी तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएम-जनमन, बैच-1) के तहत स्वीकृत सड़क निर्माण कार्य शुरू होते ही भारी विवादों में घिर गया है। संवेदक पर पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर बिना वन विभाग की अनुमति (एनओसी) के करीब 50 छोटे-बड़े फलदार और कीमती पेड़ों को जेसीबी से उखाड़ फेंकने का गंभीर आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां नई सड़क बनाई जा रही है, वहां पहले से ही वन भूमि पर एक मजबूत पीसीसी सड़क मौजूद थी। संवेदक ने बिना किसी ठोस तकनीकी कारण के अच्छी-भली चालू सड़क को ध्वस्त कर दिया, जो सीधे तौर पर सरकारी राशि का दुरुपयोग और प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी है। इस मामले में जेएलकेएम के प्रखंड अध्यक्ष महेंद्र मरांडी ने बताया कि सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता बरती जा रही है। विकास के नाम पर दर्जनों पेड़ों की अवैध कटाई कर पर्यावरण संरक्षण को भारी आघात पहुंचाया गया है। इस गंभीर मामले को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही उपायुक्त से मिलकर उन्हें जनभावनाओं से अवगत कराएगा। साथ ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी इसकी रिपोर्ट भेजी जा रही है。

स्थानीय रैयतों और वन विभाग की भूमि का पेच

​यह पूरी योजना शुरुआती चरण से ही स्थानीय रैयतों और वन विभाग की भूमि के पेच में फंसती नजर आ रही है। बीते 21 मई को ही राजमहल सांसद विजय कुमार हांसदा और लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने 1.550 किलोमीटर लंबी इस सड़क का शिलान्यास किया था। लेकिन कार्य शुरू होते ही संवेदक की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने और वन संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन के तहत संवेदक पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। इस मामले को लेकर जब दुमका-पाकुड़ के डीएफओ से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। हालांकि, विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम ने आज ही योजना स्थल पर पहुंचकर वस्तुस्थिति की जांच की है और इसकी रिपोर्ट डीएफओ को सौंप दी है। सूत्रों की मानें तो सड़क निर्माण के लिए विभाग से कोई एनओसी नहीं ली गई थी और मौके पर 50 से अधिक छोटे-बड़े पेड़ काटे गए हैं।

सड़क निर्माण के दौरान पुरानी पीसीसी को हटाने का निर्णय

वर्जन...

सड़क निर्माण के दौरान पुरानी पीसीसी को हटाने का निर्णय सर्वे और मूल्यांकन के आधार पर लिया जाता है। अगर पीसीसी का चौड़ीकरण होना है या नई सड़क बननी है, तो प्राक्कलन (इस्टीमेट) में इसे हटाने का उल्लेख अवश्य किया गया होगा। नियमों के तहत ही कार्य कराया जा रहा है।

- एतवारी मंडल, कार्यपालक अभियंता आरईओ विभाग

फोटो संख्या-05- सड़क निर्माण कार्य के दौरान उखाड़े गए पेड़

फोटो संख्या-06- उखाड़ी गयी पीसीसी सड़क

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सड़क निर्माण में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हुआ है?
हां, संवेदक पर पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर बिना वन विभाग की अनुमति के पेड़ काटने का आरोप लगा है।
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