
भाषा संवाद का माध्यम ही नहीं, सांस्कृतिक विरासत की धड़कन: पीडीजे
डीपीएस पाकुड़ में भारतीय भाषा उत्सव-25 का समापन हुआ। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेष नाथ सिंह ने दीप प्रज्वलन कर समारोह का उद्घाटन किया। बच्चों ने विभिन्न भारतीय भाषाओं में कविताएं और नाटक प्रस्तुत किए। प्रधानाचार्य जे.के. शर्मा ने इस आयोजन की महत्ता बताई, जिसमें भाषाई सद्भाव और विविधता का सम्मान किया गया।
पाकुड़। डीपीएस पाकुड़ में आयोजित भारतीय भाषा उत्सव- 25 का समापन गुरूवार को सद्भावपूर्ण व मनोरंजन से परिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। समापन समारोह का उद्धाटन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पाकुड़ शेष नाथ सिंह ने दीप प्रज्वलन कर किया। मौके पर विविध भाषाई एकता प्रस्तुत करती कविताएं और लघु नाट्य मंचन किया गया। बच्चों ने भारतीय भाषा अनेक-भाव एक की बानगी प्रस्तुत करते हुए विभिन्न भाषाओं जैसे गुजराती बंगाली, हिंदी, उड़िया, तमिल, तेलगु, पंजाबी, अंग्रेजी आदि भाषाओं में कविता पाठ के साथ साथ बच्चों ने कई भारतीय भाषाओं में बहुत ही मनोरंजक और ज्ञानवर्धक नाटक का भी मंचन किया।
न्यायाधीश ने सीबीएसई के तत्वाधान में डी.पी.एस द्वारा किए गए इस विविध भाषाई भावनात्मक एकता कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दिया। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान करना चाहिए। जितना संभव हो हमें अपना भाषा ज्ञान बढ़ाने के साथ-साथ कम से कम अपनी प्रांतीय भाषा को जरूर सीखना चाहिए। इससे हमें प्रांतीय सभ्यता, संस्कृति, लोकाचार और साहित्य को समझने-सीखने में मदद मिलती है। क्योंकि भाषाएं केवल संवाद का साधन नहीं, सांस्कृतिक विरासत की धड़कन भी हैं। प्रधानाचार्य जे.के. शर्मा ने विद्यालय में एक सप्ताह से चल रहे इस भाषा उत्सव के बारे अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह आयोजन सीबीएसई द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किया गया था। इसके सभी विषय भाषाई सद्भाव पर जोर देते हैं। उत्सव के सात दिनों के लिए अलग-अलग थीम रखी गई थी। इस कार्यक्रम के द्वारा बच्चों ने यह समझा कि विविध भारतीय भाषाओं की भावना एक ही है। इस दौरान छात्रों को विभिन्न प्रांतो के साहित्य, संस्कृति, भौगोलिक स्थिति, खान-पान, वेशभूषा, त्यौहार आदि के बारे में व्यावहारिक रूप से सीखने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ। विद्यालय के निदेशक अरुणेंद्र कुमार ने सभी मुख्य अतिथियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए भारतीय भाषा उत्सव-25 के सफल आयोजन के लिए डीपीएस के प्रधानाचार्य, शिक्षक गण और सभी छात्र-छात्राओं को बाधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के विविध भाषाई एकता उत्सव के माध्यम से बच्चों को यह सीख मिलती है कि वे किसी देश या क्षेत्र की विभिन्न भाषाएँ सीखें, एक-दूसरे का समर्थन करें और राष्ट्रीय पहचान व संस्कृति को मजबूत करें, न कि अलग-थलग पड़े।

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