बीआरपी-सीआरपी ने काला बिल्ला लगाकर किया कार्य
हिरणपुर में बीआरपी एवं सीआरपी कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर काला बिल्ला लगाकर प्रदर्शन शुरू किया है। यह आंदोलन 15 से 20 दिसंबर तक विरोध सप्ताह के रूप में मनाया जाएगा, और 22 दिसंबर को रांची में न्याय सभा का आयोजन होगा। कर्मियों की मुख्य मांगों में सामाजिक सुरक्षा और सेवा शर्तों में सुधार शामिल हैं।

हिरणपुर। बीआरपी एवं सीआरपी कर्मियों ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर काला बिल्ला लगाकर कार्य करना शुरू कर दिया है। इस आंदोलन को कर्मी 15 से 20 दिसंबर तक विरोध सप्ताह के रूप में मनाएंगे। वहीं 22 दिसंबर को रांची स्थित जेईपीसी कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय न्याय सभा सह धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में जिला सचिव संजय जयसवाल ने बताया कि बीआरपी-सीआरपी कर्मी वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे हैं। लेकिन अब तक उन्हें बुनियादी सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक सेवा शर्तों से वंचित रखा गया है। सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने के उद्देश्य से यह चरणबद्ध आंदोलन किया जा रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि संगठन की प्रमुख मांगों में आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में ईपीएफ के तहत 6 लाख रुपये का लाभ शीघ्र प्रदान करना, संविदा नियमावली 2024 के तहत मृतक कर्मी के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देना तथा गंभीर बीमारियों को देखते हुए 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य बीमा सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा 15 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले कर्मियों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने, बीआरपी एवं सीआरपी को अर्जित अवकाश एवं ग्रेच्युटी का लाभ देने तथा संविदा नियमावली के अनुरूप मानदेय में 3 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि लागू करने की भी मांग की गई है। वहीं महंगाई और ईपीएफ कटौती को ध्यान में रखते हुए मूल मानदेय में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी एवं सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने की मांग भी संगठन द्वारा उठाई गई है। इस आंदोलन में नरेंद्र साहा, संजय जयसवाल, सोमित्रो सेन, प्रमोद भंडारी, अलीहुसैन अंसारी, कुमुद साहा, रुमीना यास्मीन, सुजाता सरकार सहित अन्य बीआरपी-सीआरपी कर्मी शामिल रहे।

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