11 लाख की मरम्मती के बाद भी राहगीर हलकान

Mar 01, 2026 05:06 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, पाकुड़
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अमड़ापाड़ा के मुख्य बाजार को दुमका-पाकुड़ हाईवे से जोड़ने वाली लिंक रोड की स्थिति बेहद खराब है। सड़क उखड़ी हुई है और गिट्टियां दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। प्रशासन ने धूल से राहत देने के लिए पानी का छिड़काव शुरू किया है, लेकिन स्थानीय लोग कोयला कंपनियों के विकास के नाम पर धोखा महसूस कर रहे हैं।

11 लाख की मरम्मती के बाद भी राहगीर हलकान
​अमड़ापाड़ा, एक संवाददाता। प्रखंड मुख्यालय स्थित मुख्य बाजार को दुमका-पाकुड़ हाईवे से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण लिंक रोड इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। यह सड़क जो इलाके की लाइफलाइन मानी जाती है। अब राहगीरों के लिए दुर्घटना का सबब साबित हो रही है। पूरी सड़क की सतह उखड़ चुकी है और जगह-जगह बिखरी गिट्टियां दोपहिया वाहन चालकों के लिए जानलेवा बन गई हैं। आए दिन बाइक सवार इन गिट्टियों पर फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। ​खानापूर्ति बनकर रह गई 11 लाख की मरम्मती : सड़क की इस दुर्दशा को दूर करने के लिए पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल पाकुड़ द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11,41,900 रुपए की निविदा निकाली गई थी। सरकारी फाइलों में 03 किलोमीटर लंबी इस सड़क की आकस्मिक मरम्मती का प्रावधान था, लेकिन धरातल पर इसकी तस्वीर अलग है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मती के नाम पर महज तीन दिनों तक गड्ढों को भरने की खानापूर्ति की गई। काम खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद सड़क की स्थिति फिर से जस की तस हो गई है।

​धूल के गुबार से सांसों पर संकट : क्षेत्र में बीजीआर और डीबीएल जैसी दो बड़ी कोल कंपनियां उत्खनन कार्य कर रही हैं, लेकिन विकास के नाम पर अमड़ापाड़ा बाजार के लोगों को सिर्फ धूल नसीब हो रही है। बारिश न होने पर स्थिति और भयावह हो जाती है। सड़क पर उखड़ी मिट्टी और पत्थर के बारीक कण हवा में तैरते रहते हैं, जिससे न केवल वाहन चलाने में दिक्कत होती है, बल्कि स्थानीय दुकानदारों और निवासियों को सांस संबंधी बीमारियों का खतरा सता रहा है।

​प्रशासन की पहल, टैंकर से छिड़काव शुरू : बीते दिनों होली को लेकर आयोजित शांति समिति की बैठक में यह मामला प्रमुखता से उठा था। बीडीओ प्रमोद कुमार और सीओ असद औसफ खां ने समस्या की गंभीरता को देखते हुए तुरंत संज्ञान लिया। अधिकारियों के निर्देश पर कोल कंपनी के प्रतिनिधियों ने बाजार क्षेत्र में दिन में तीन बार पानी का छिड़काव शुरू कर दिया है, जिससे फिलहाल धूल से थोड़ी राहत मिली है।

क्या कहते है ग्रामीण...

हैरानी की बात है कि जिस सड़क के ठीक बगल में डीबीएल जैसी बड़ी कंपनी का कार्यालय स्थित है, वहीं की मुख्य सड़क की सुध लेने वाला कोई नहीं है। कोयला निकालने वाली ये कंपनियां महज कागजों पर कोरम पूरा कर अवार्ड बटोरने में जुटी हैं, जबकि धरातल पर वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है। सीएसआर के नाम पर क्षेत्र की जनता के साथ छलावा किया जा रहा है।

मंटु भगत, समाजसेवी, अमड़ापाड़ा

मुख्य सड़क होने के कारण यहां से दिन-भर लोगों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन उखड़ी हुई गिट्टियों के चलते हर वक्त दुकान के सामने दुर्घटना का डर बना रहता है। महज तीन दिन की मरम्मती के बाद काम छोड़ दिया गया, जिससे गड्ढे फिर से उभर आए हैं और राहगीरों को भारी परेशानी हो रही है।

सुमित कुमार भगत, स्थानीय दुकानदार, अमड़ापाड़ा

​बीजीआर कंपनी अमड़ापाड़ा में बीते 07 वर्षों से उत्खनन कार्य कर रही है, लेकिन प्रखंड के सौंदर्यीकरण के नाम पर धरातल पर कुछ नहीं दिखा। न तो मुख्य सड़कें बनीं और न ही नाली, साफ-सफाई या स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था हुई। इस साल जो मरम्मती का टेंडर निकला, उसमें भी महज दो-चार जगहों पर गड्ढे भरकर खानापूर्ति की गई, जो कुछ ही दिनों में फिर से जर्जर हो गए।

अमित कुमार भगत, पूर्व वार्ड सदस्य, अमड़ापाड़ा

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