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सारंडा को 3 माह में करें अभयारण्य अधिसूचित, सुप्रीम कोर्ट का एक और सख्त आदेश

सारंडा को 3 माह में करें अभयारण्य अधिसूचित, सुप्रीम कोर्ट का एक और सख्त आदेश

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को सारंडा वन क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की अदालत ने सुनवाई के दौरान गुरुवार को सरकार को निर्देश दिया कि तीन माह में सारंडा को अभयारण्य अधिसूचित करें।

Nov 14, 2025 07:06 am ISTMohammad Azam लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को सारंडा वन क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की अदालत ने सुनवाई के दौरान गुरुवार को सरकार को निर्देश दिया कि तीन माह में सारंडा को अभयारण्य अधिसूचित कर वन अधिकार अधिनियम के तहत यह सुनिश्चित करें कि वहां आदिवासियों व वनवासियों का अधिकार सुरक्षित रहे। साथ ही क्षेत्र में स्थित स्कूल, रेललाइनें, स्वास्थ्य केंद्र समेत अन्य जन सुविधाएं संरक्षित रहे। कहा, किसी भी स्थिति में वहां खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार के 31468.25 हेक्टेयर के बदले 24,941 हेक्टेयर को ही अभयारण्य घोषित करने के अनुरोध को ठुकराते हुए सारंडा वन क्षेत्र के 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने को कहा।

न्याय मित्र ने भी उठाए थे सवाल

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त न्याय मित्र वरीय अधिवक्ता के. परमेश्वर ने अभयारण्य क्षेत्र को लेकर सरकार की ओर से उठाए कदमों पर सवाल खड़े किए थे।

कहा था कि राज्य सरकार ने शपथपत्र में कहा है कि वह अब 24,941 हेक्टेयर क्षेत्र को ही अभयारण्य घोषित करना चाहती है, जबकि पहले 57,519.41 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित था, जिसे बाद में घटाकर 31,468.25 हेक्टेयर किया गया था। न्याय मित्र ने सरकार की इस बदलती स्थिति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन 126 खनन प्रभागों में पहले खनन न होने की बात कही गई थी, अब उन्हीं हिस्सों को अभयारण्य क्षेत्र से बाहर रखा जा रहा है। सेल को भी प्रस्तावित क्षेत्र में खनन की अनुमति नहीं दी थी

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान सेल की ओर से कहा गया था कि प्रस्तावित क्षेत्र में कुछ खदानें आवंटित हैं, पर अभी चालू नहीं हुईं। इस पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि अभयारण्य क्षेत्र में हम उन 126 खनन प्रभाग (कम्पार्टमेंट्स) के भीतर किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि की अनुमति नहीं देंगे। कानून भारत सरकार और अन्य खनन एजेंसियों के लिए अलग नहीं हो सकता।

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युवा पत्रकार आजम ने लाइव हिन्दुस्तान के साथ पत्रकारिता की शुरुआत की। 8 राज्यों की पॉलिटिकल, क्राइम और वायरल खबरें कवर करते हैं। इनकी मीडिया की पढ़ाई भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से हुई है। इंटरव्यू, पॉडकास्ट और कहानियां कहने का शौक है। हिंदी, अंग्रेजी साहित्य के साथ उर्दू साहित्य में भी रुचि है। और पढ़ें
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