कम्युनिटी नोट्स बंद करें या भरें 'पब्लिशर टैक्स', निशिकांत दुबे की मांग; भड़के यूजर्स

Krishna Bihari Singh हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्ली
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भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सुझाव दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के कम्युनिटी नोट्स फीचर को एक प्रकाशन गतिविधि के तौर पर लिया जाना चाहिए। इससे उस पर पब्लिशर टैक्स के नियम लागू हो सकते हैं।

कम्युनिटी नोट्स बंद करें या भरें 'पब्लिशर टैक्स', निशिकांत दुबे की मांग; भड़के यूजर्स

एक संसदीय समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स पर अपने एक पोस्ट पर 'कम्युनिटी नोट्स' फीचर पर अपनी बात रखी लेकिन वे ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए। निशिकांत दुबे ने सुझाव दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 'कम्युनिटी नोट्स' फीचर को एक प्रकाशक की गतिविधि के तौर पर लिया जाना चाहिए। उन्होंने एक्स पर कहा कि 'कम्युनिटी नोट्स' जैसी विशेषताओं को एक प्रकाशन गतिविधि माना जा सकता है। इससे इस प्लेटफॉर्म की भूमिका एक मध्यस्थ से बदलकर एक प्रकाशक की हो सकती है।

इतना हंगामा क्यों है?

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा- यार, ये कम्युनिटी नोट्स को लेकर इतना हंगामा क्यों मचा है? एक्स कॉरपोरेशन इंडिया @XCorpIndia लगातार नोट्स छापता जा रहा है लेकिन भारत सरकार को कोई टैक्स नहीं देता। ये कैसा इंसाफ है? ऑस्ट्रेलिया के कानून की तरह इसे भी भारत में 'पब्लिशर्स लाइसेंस' लेना चाहिए और हर साल भारत सरकार को 25 हजार करोड़ रुपये का टैक्स देना चाहिए वरना कम्युनिटी नोट्स बंद कर देना चाहिए। जैसे एक्स हर साल ऑस्ट्रेलिया सरकार को 7,000 करोड़ रुपये का टैक्स देता है।

यूजर्स के निशाने पर आए निशिकांत दुबे

निशिकांत दुबे के इस पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। भाजपा नेता ट्र्रोलर्स के निशाने पर आ गए हैं। यूजर्स का कहना है कि इससे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।हालांकि, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को संसदीय समिति से अभी तक कोई औपचारिक सिफारिश नहीं मिली है। हालांकि मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि यदि कोई औपचारिक सिफारिश मिलती है तो उसकी समीक्षा होगी।

क्या है संसदीय समिति का विचार?

बता दें कि कम्युनिटी नोट्स यूजर्स जेनरेटेड फीचर है जो एक्स यूजर्स को किसी पोस्ट के नीचे संदर्भ जोड़ने की सुविधा देता है। संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कम्युनिटी नोट्स बंद करने का निर्देश दे या उन पर पब्लिशर टैक्स लगाने पर विचार करे।

पैनल की ये बातें सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखते हुए कही गई हैं। इन बदलावों का उद्देश्य सरकारी निगरानी को बढ़ाकर आम यूजर्स द्वारा डाली गई जानकारी तक पहुंचाना है जिसमें कम्यूनिटी नोट्स जैसे फीचर भी शामिल हैं। खासकर तब जब माला पॉलिटिक्स या सरकारी नीतियों से जुड़े हों। इससे 'कम्युनिटी नोट्स' सूचना और प्रसारण मंत्रालय के नियंत्रण में आ सकते हैं।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


संक्षिप्त विवरण

कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

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पत्रकारिता का उद्देश्य: कृष्ण बिहारी सिंह 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ काम करते हैं। केबी का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी उसका राष्ट्र और लोक कल्याण है। केबी खबरों को पहले प्रमाणिकता की कसौटी पर कसते हैं, फिर आम जनमानस की भाषा में उसे परोसने का काम करते हैं। केबी का मानना है कि रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचना देना वरन उन्हें सही और असल जानकारी देना है।

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