झारखंड में भीड़ ने मां और 2 माह के मासूम को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया, हत्या की क्या वजह?

Feb 18, 2026 08:30 pm ISTRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, जमशेदपुर, राकेश सिंह
share

कुमारडूंगी थाना क्षेत्र के कलाईया गांव में डायन होने का आरोप लगाकर 32 वर्षीय महिला और उसके दो माह के नवजात को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। जबकि पति गंभीर रूप से झुलसने के बावजूद जान बचाकर भागने में सफल रहा।

झारखंड में भीड़ ने मां और 2 माह के मासूम को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया, हत्या की क्या वजह?

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले से अंधविश्वास के चलते एक ही परिवार को आग में झोंक देने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। कुमारडूंगी थाना क्षेत्र के कलाईया गांव में डायन होने का आरोप लगाकर 32 वर्षीय महिला और उसके दो माह के नवजात को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। जबकि पति गंभीर रूप से झुलसने के बावजूद जान बचाकर भागने में सफल रहा।

घर में सो रहा था परिवार, तभी…

घटना मंगलवार रात करीब नौ बजे की बताई जा रही है। जीवित बचे 40 वर्षीय कोल्हान सिंकु के अनुसार वह अपनी दूसरी पत्नी ज्योति सिंकु (32 वर्ष), दो वर्ष के बेटे और दो माह के नवजात के साथ घर में सो रहा था। तभी गांव के ही रिश्ते के भांजे राशिका बिरुवा ने बाहर से आवाज लगाई। वह पत्नी के साथ बाहर निकला। तभी बड़ी पत्नी जानी सिंकु भी बाहर आ गई।

पेट्रोल डालकर मां-बेटे को जिंदा जलाया

बाहर आने पर देखा कि आंगन में लगभग एक दर्जन से अधिक महिला-पुरुष और बच्चे मौजूद थे। सभी ने ज्योति सिंकु पर डायन होने का आरोप लगाया। कोल्हान सिंकु ने सुबह पंचायत में फैसला करने की बात कही, लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी। पेट्रोल से भरा गैलन लाकर उन पर उड़ेल दिया गया और माचिस जलाकर आग लगा दी गई। आग की लपटें उठते ही कोल्हान सिंकु किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग निकला और रास्ते में जलते कपड़े को उतारकर सुबह थाने पहुंचा और जानकारी दी।

एक ही परिवार के दस से अधिक लोग शामिल

बुधवार सुबह कुमारडूंगी पुलिस ने कोल्हान को अस्पताल में भर्ती कराया और गांव पहुंचकर महिला व नवजात के शव को कब्जे में लिया। इस वारदात में एक ही परिवार के करीब बारह लोग शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने बताया इस मामले में अब तक 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

आज भी डायन प्रथा एक गंभीर समस्या है

आपको बताते चलें कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में डायन प्रथा आज भी एक गंभीर सामाजिक समस्या बनी हुई है। अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के कारण महिलाओं, विशेषकर विधवाओं और अकेली रहने वाली महिलाओं को ‘डायन’ बताकर प्रताड़ित किया जाता है। कई मामलों में उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाता है, मारपीट की जाती है या गांव से निकाल दिया जाता है।

कड़े कानून के बावजूद सामने आ रहे मामले

राज्य में इस कुप्रथा को रोकने के लिए कड़ा कानून लागू है, फिर भी समय-समय पर हिंसा की घटनाएं सामने आती रहती हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि अशिक्षा, गरीबी और जागरूकता की कमी इस समस्या की जड़ हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कानून के साथ-साथ शिक्षा और सामाजिक जागरूकता ही इस कुरीति को खत्म करने का स्थायी समाधान है।

Ratan Gupta

लेखक के बारे में

Ratan Gupta

रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

और पढ़ें