लाश की मांग में सिंदूर भरा, अंतिम संस्कार से पहले शादी की रस्में निभाईं; हत्या के आरोप में गिरफ्तार
झारखंड में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक लड़की की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए युवक ने अंतिम संस्कार से पहले लड़की की लाश की मांग में सिंदूर भरा और शादी की रस्में निभाईं। दोनों के परिवारों ने उनकी शादी तय कर दी थी। सगाई के बाद लड़की अपने होने वाले पति के साथ रह रही थी।

झारखंड में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक लड़की की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए युवक ने अंतिम संस्कार से पहले लड़की की लाश की मांग में सिंदूर भरा और शादी की रस्में निभाईं। दोनों के परिवारों ने उनकी शादी तय कर दी थी। सगाई के बाद लड़की अपने होने वाले पति के साथ रह रही थी।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के गिरिडीह जिले में एक युवती की संदिग्ध मौत के मामले ने उस समय एक अजीब मोड़ ले लिया, जब उसकी कथित हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए युवक ने उसकी चिता को अग्नि देने से पहले उसके शव के साथ प्रतीकात्मक रूप से शादी की रस्में निभाईं। दोनों के परिवारों ने लगभग चार महीने पहले ही उनकी शादी तय कर दी थी।
सगाई के बाद साथ रह रहा था
सगाई हो जाने के बाद आरोपी मनीष मुर्मू अपनी मंगेतर को अपने साथ रहने के लिए अपने घर ले आया। लड़की के परिवार का आरोप है कि शादी के बहाने उसे जबरदस्ती आरोपी के घर में तब तक रोककर रखा गया, जब तक कि उसकी तबीयत बिगड़ नहीं गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
पिता ने दर्ज कराया मामला
इस मामले में महिला के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, मनीष और शिकायतकर्ता की बेटी पिछले चार महीनों से साथ रह रहे थे। जब लड़की के माता-पिता ने कथित तौर पर दूल्हे वालों पर शादी करने का दबाव डाला तो शुक्रवार सुबह उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी की तबीयत खराब है। यह सुनते ही वे मनीष के घर पहुंचे और अपनी बेटी को तुरंत एक सरकारी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
दोनों परिवारों का शव लेने से इनकार
लड़की की मौत की सूचना मिलने के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। हालांकि, पोस्टमार्टम के बाद एक चौंकाने वाला मोड़ आया, जब दोनों परिवारों ने शव लेने से इनकार कर दिया। हालात बिगड़ते देख पुलिस शव को स्थानीय थाने ले गई, जहां वह पूरी रात रखा रहा। बाद में शनिवार को पुलिस शव को मनीष के गांव ले गई। दोनों परिवारों के बीच भारी तनाव को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
पीटने और जहर देने का आरोप
पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में लड़की के पिता ने आरोप लगाया कि मनीष ने उनकी बेटी को बुरी तरह पीटा और उससे शादी करने से बचने के लिए उसे जहर खाने पर मजबूर किया। पिता ने आरोप लगाया कि जहर खाने की वजह से ही महिला की मौत हो गई।
पुलिस ने गिरफ्तार किया
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मनीष को गिरफ्तार कर लिया गया। उसी दिन बाद में पुलिस द्वारा स्थिति को शांत करने के बाद लड़की का शव आखिरकार उसके घर लाया गया। उसके परिवार की मांग पर मनीष को पुलिस सुरक्षा में वहां लाया गया। फिर उसने अपनी मंगेतर की मांग में सिंदूर भरा और अंतिम संस्कार पूरा करने से पहले शादी की अन्य रस्में निभाईं।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


