
निशिकांत दुबे को लोकपाल से क्लीन चिट, कांग्रेस पर बरसते हुए कहा- मेरा मुंह बंद नहीं हो सकता...
BJP MP Nishikant Dubey: लोकपाल के इस फैसले के बाद भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर फिर से निशाना साधा है। उन्होंने हमलावर होते हुए कहा- मेरा मुँह बंद नहीं हो सकता। कांग्रेस के काले कारनामों को जनता के समक्ष पेश करना मेरा कर्तव्य है। जानिए क्या है पूरा मामला?
BJP MP Nishikant Dubey: लोकपाल ने झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति को लेकर दायर शिकायत को खारिज कर दिया है। यह शिकायत सोशल एक्टविस्ट अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर की गई थी। लोकपाल के इस फैसले के बाद भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर फिर से निशाना साधा है। उन्होंने हमलावर होते हुए कहा- “मेरा मुँह बंद नहीं हो सकता। कांग्रेस के काले कारनामों को जनता के समक्ष पेश करना मेरा कर्तव्य है।” जानिए क्या है पूरा मामला?
दायर शिकायत निराधार और तुच्छ
सबसे पहले आपको बताते हैं कि लोकपाल की तरफ से क्या कहा गया है। लोकपाल ने 13 जनवरी 2026 को जारी 134 पन्नों के आदेश में कहा- ‘शिकायत में लगाए गए आरोप निराधार, तुच्छ और दुर्भावनापूर्ण हैं।’ न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत का मुख्य निशाना सांसद निशिकांत दुबे नहीं, बल्कि उनकी पत्नी थीं।
पीठ ने इसको विस्तार देते हुए कहा- लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में केवल लोक सेवक ही आते हैं, न कि परिवार के अन्य लोग। लोकपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि सांसद दुबे की संपत्तियों में केवल मामूली बदलाव पाया गया है और उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।
संपत्ति में बढ़तोरी की नहीं हुई स्वतंत्र पुष्टि
शिकायत में वर्ष 2009 से 2024 तक के चुनावी हलफनामों का हवाला देते हुए सांसद की पत्नी की संपत्ति में कथित बढ़ोतरी का आरोप लगाया गया था। हालांकि, लोकपाल ने पाया कि शिकायत सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारियों पर आधारित थी और इनकी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई थी।
शिकायतकर्ता को लगी फटकार
लोकपाल ने अपने आदेश में अमिताभ ठाकुर की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कहा कि शिकायत को राजनीतिक या व्यक्तिगत दुर्भावना से प्रेरित होकर आगे बढ़ाया गया। इसके साथ ही, शिकायत को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन भी किया गया। हालांकि, लोकपाल द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को बाद में समाप्त कर दिया गया।
निशिकांत दुबे को शिकायत करने की मिली छूट
लोकपाल ने सांसद निशिकांत दुबे को यह छूट दी है कि वे अपनी प्रतिष्ठा और निजता को नुकसान पहुंचाने के आरोप में शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। आदेश में यह भी कहा गया कि लोक सेवकों की प्रतिष्ठा की रक्षा करना संस्थान की जिम्मेदारी है और बिना आधार के लगाए गए आरोपों को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।
मेरा मुंह बंद नहीं हो सकता...
इस पूरे मामले में निशिकांत दुबे ने रिएक्शन देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा- मेरा मुँह बंद नहीं हो सकता। कांग्रेस के काले कारनामों को जनता के समक्ष पेश करना मेरा कर्तव्य है। मेरे तथा मेरे परिवार के उपर लगाए गए झूठे आरोपों पर आज माननीय लोकपाल जी ने निर्णय दिया। मुझे माननीय लोकपाल जी ने आदेश दिया कि झूठे आरोपों के आधार पर मेरे परिवार के इज़्ज़त को ठेस पहुँचाने के लिये मुझे न्यायपालिका या लोकसभा से इन लोगों के उपर उत्पीड़न का मुक़दमा दायर करना चाहिए। सत्यमेव जयते।
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लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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