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कोल डंपिंग यार्ड के खिलाफ फिर खड़े हुए ग्रामीण

कोल डंपिंग यार्ड के खिलाफ फिर खड़े हुए ग्रामीण

लोहरदगा कुड़ू के बड़की चांपी कमले रेलवे स्टेशन में चल रहे कोल डंपिंग यार्ड में कुछ माह से फिर से गुटबाजी और यार्ड का विरोध जोरदार ढंग से शुरू हो गया है। आज 12 अगस्त को भी कमले स्कूल में खास लोगो के अगुवाई में ग्रामीणों की एक बैठक हुई। जिसमें इस यार्ड को यहां से हटाने को लेकर आंदोलन करने का निर्णय लिया गया। हालांकि इस यार्ड का विरोध गांव के अधिकतर लोग शुरू से ही करते आ रहे हैं, लेकिन विरोधी खेमे के लोगो को कोयला के कारोबारियों ने लालच देकर आंदोलन तोड़ने में अहम भूमिका निभाई। इस बार के बैठक में भी कई यैसे चेहरे विरोध करते नजर आए जो शुरू से ही डंपिंग यार्ड को खुलवाने, चालू कराने और कोयला लोडिंग तक मे एक खास भूमिका में नजर आते थे।

कमले रेलवे स्टेशन में प्रदूषण सहित कई नियमों को ताक में रखकर खुले इस डंपिंग यार्ड से अभी तक सैकड़ो रेक कोयला अरबो रुपये का कारोबार हो चुका है। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों व क्षेत्र का अभी तक कोई विकास नही हुआ है। ग्रामीणों को सुविधा देने के बजाय इस यार्ड से केवल समस्या ही मिली है। आये दिन ग्रामीण सड़को पर सैकड़ों की संख्या में कोयला लोड भारी वाहनों के चलने से जहा गर्मी के दिनों में लोगो को कोयले की धूल से परेशान रहे अब इस बरसात के मौषम में जिन रास्ते से कोयला गाड़ी गुजरती है चापी, कमले सभी सड़क खाच में तब्दील हो गया है। लोगो का इस रोड में चलना दूभर हो गया है। इतना ही नहीं कमले रेलवे स्टेशन ट्रेन पकड़ने जानेवाले यात्रियों को भी स्टेशन पहुचने में काफी मुश्किल हो रहा है।

हर बार ग्रामीणों के कंधे में बंदूक रख निशाना साधा गया।

बड़की चापी कमले रेलवे स्टेशन में कोल डंपिंग यार्ड खुलने से लेकर उसके चालू होने लोडिंग कराने सहित सभी कार्यों में नेताओं और कोयले के कारोबारियों ने हर बार ग्रामीणों को कंधे के रूप में इस्तेमाल किया। ग्रामीणों को सब्जबाग दिखाकर अपना उल्लू सीधा करने का काम किया।

कोयले के काले खेल में हर कोई सफेद बनना चाह रहा है

एक कारोबारी ने अपना जमीन में रास्ता भी बनवाया जिससे कि कोयला गाड़ी का आवागमन सही ढंग से हो पाए। बाद में कुछ खटपट होने पर पिछले माह ही वही रास्ता जेसीबी से खुदवाकर अपना जमीन को अपने कब्जे में कर लिया। इसी तरह इलाके कुछ बाहुबली जो विरोध कर रहे लोगों को दबाने के लिए आंदोलन को तोड़ने की, ढुलाई शुरू कराने को लेकर अपनी सारी ताकत झोंक दी। वहीं डंपिंग यार्ड का विरोध सड़क पर उतरकर कर रहे हैं। पंचायत चुनाव में जीतकर प्रखंड के मुख्य पर पद पर आसीन एक माननीय डंपिंग यार्ड के शुरुआत से लेकर अब तक अपनी राजनीति करते नहीं अघा रहे हैं। जब से उनके इलाके में डंपिंग यार्ड शुरू होने की प्रक्रिया हुई, उनका दर्शन मुख्यालय अपने कार्यालय में होना भी दुर्लभ हो गया। यानी एक तरफ यार्ड का विरोध करते नजर आते हैं वहीं दूसरी तरफ कोयले के कारोबारियों के लिए डंपिंग यार्ड के लिए जमीन पट्टा दिलाने में भी खूब अपनी सक्रियता दिखाई। वही नेता के एक खास शागिर्द जो वर्तमान में वारंटी भी है, लेकिन अभी तक लोडिंग में खास भूमिका निभाते चले आ रहे है, जिसके कंधे लोडिंग से लेकर मैनेज तक का मामला था। जिसके मैनेज में कमी के कारण एक बार फिर मामला गर्म होने की चर्चा है।

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  • Web Title:villagers rise against coal dumping yard