अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

लोहरदगा के ग्रामीण हाटों की हालत हुई खस्ता

लोहरदगा के ग्रामीण हाटों की हालत हुई खस्ता

सरकार द्वारा बाजार हाटों को टैक्स फ्री कर दिए जाने के बाद हाटों की हालत खस्ता है। व्यवसायियों और किसानों को ग्रामीण हाटों में सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। न ही आधारभूत संरचना में सुधार हो रहा है। समिति के पांचों गोदाम जर्जर हैं। कुछ तो ध्वस्त होने की हालत में हैं।

लोहरदगा कृषि बाजार समिति सिर्फ नाम की रह गई है। बाजारों में सुविधा बहाल करने की मांग व्यवसाय करते हैं तो समिति अपनी लाचारी का रोना रोती है।

साल 2014 -15 में लोहरदगा कृषि बाजार समिति को हाट बाजारों से एक करोड़ 11 लाख रुपए का राजस्व मिला था। अब फूटी कौड़ी नहीं मिलती।

लोहरदगा में 16 हाट हैं। किस्को हाट में कई सालों पहले बनाई गई 20 दुकाने जर्जर हो चुकी हैं। ध्वस्त होने के कगार पर हैं। मगर इनकी मरम्मती नहीं हो पा रही है। किस्को के अलावा चट्टी, शुक्र बाजार लोहरदगा और रानीगंज हाट के मार्केट शेड की भी हालत खस्ता है।

कृषि बाजार समिति की व्यवस्था इसलिए भी अधिक खस्ताहाल हो गई है। क्योंकि इसके भवनों का किराया सही से नहीं मिल रहा। भवन की मरम्मत और सुविधाएं नहीं मिलने के कारण किराए पर लेने वाले कृषि व्यवसायी असंतुष्ट है।

बाजार समिती प्रांगण में स्टेट फूड कॉरपोरेशन ने गोदाम किराए पर ले रखा है। हाल यह है कि इस गोदाम का ताला कई सालों से नहीं खुला है। इस गोदाम में अनाज भी है। मगर कितनी मात्रा में यह कृषि बाजार समिति को भी मालूम नहीं है। जाहिर सी बात है कि सालों से ताला नहीं खुलने के कारण अनाज अंदर सड़ रहा होगा। पणन सचिव अभय कुमार का कहना है कि एस एफ सी के पास किराए का चार लाख रूपए बकाया है। कई बार नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं हो रहा है। कुल मिलाकर कृषि बाजार समिति चौतरफा समस्याओं में घिरी अपना वजूद होने के कगार पर है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:rural markets in poor condition