
लोहरदगा में छोटी इलाइची, वैनिला और काली मिर्च की खेती शुरू
संक्षेप: लोहरदगा के सलगी गांव में छोटी इलायची, काली मिर्च और वैनिला की जैविक खेती शुरू की गई है। यह परियोजना जनजातीय किसानों के जीवन में समृद्धि लाने का प्रयास है। अगर यह सफल होता है, तो लोहरदगा जिले को...
लोहरदगा, संवाददाता। लोहरदगा के सलगी गांव से जिला के सारे गांवों में छोटी इलाइची, काली मिर्च और वैनिला की जैविक खेती के अभियान को पहुंचने के उद्देश्य से इनके पौधे लगाकर मसाले की खेती का शुभारंभ किया गया। इन मसाले खेती के लिए यहां की जलवायु उपयुक्त बताई जा रही है। यह सफल हुआ तो निश्चित रूप से न केवल लोहरदगा, बल्कि झारखंड के लिए क्रांतिकारी पहल मानी जाएगी। जिला प्रशासन और प्रदान संस्था के संयुक्त प्रयास से कुडू प्रखण्ड के सलगी पंचायत के रोचो बरवाटोली में इसकी शुरुआत की गई है। डीसी डॉ ताराचंद, डीडीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत अन्य अधिकारियों, प्रदान के मो फहद खान समेत जनप्रतिनिधियों ने पौधा का रोपण किया।
इसमें छोटी इलाइची की खेती दो एकड़, काली मिर्च की खेती डेढ़ एकड़ और वैनिला की खेती एक एकड़ की खेती की जा रही है। जिला प्रशासन और प्रदान संस्था की ओर से सेनेम नेरेम किसान उत्पादक समूह के किसानों को तकनीकी सहायता देकर इन फसलों की खेती प्रारंभ की गयी है। डीसी ने कहा कि कुडू के सलगी पंचायत के रोचो बरवाटोली में इंटीग्रेटेड फार्मिंग के तहत छोटी इलायची, काली मिर्च और वैनिला की खेती प्रारंभ हो रही है। यह यहां के जनजातीय किसानों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली लायेगा। इंटीग्रेटेड फार्मिंग के तहत इन फसलों की खेती झारखंड में पहली बार हो रही है। अगर यह सफल रहता है तो यह एक क्रांति की तरह होगा। हम इसे पूरे जिला में करेंगे, ताकि लोहरदगा जिला इन फसलों निर्यातक जिलों में शामिल हो सके। तीनों फसलें दोगुनी व तिगुनी आय देने वाली फसलें हैं। किसान अपने उत्पाद के लिए ग्लोबल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अपने उत्पाद बेचे तो खरीदार की कभी कमी नहीं होगी। किसान आर्थिक रूप से सुदृढ़ हों, तो जिला विकसित और खुशहाल हो सकता है। किसानों का आह्वान किया गया कि वह व्यवसायिक फसलों की खेती करें, इससे न सिर्फ आप आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे, बल्कि आप अन्य जोखिम उठाने में भी सक्षम होंगे। इन फसलों से आपको मेहनत की सही कीमत मिल सकेगी। पारंपरिक फसलों के अपेक्षा व्यावसायिक फसलों में अधिक मुनाफा होता है। किसान अपने फसल का बीमा भी कराएं। इंटीग्रेटेड फार्मिंग को सभी किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता है, इससे अधिक से अधिक किसान जैविक खेती से जुड़ सकें।

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