Lohardaga News: नगर की आबादी बढ़ी, लेकिन सुविधाओं का बना रहा टोटा
Lohardaga News: लोहरदगा जिले की जनसंख्या वृद्धि के साथ बुनियादी सुविधाओं का विकास नहीं हुआ है। ग्रामीणों का शहर की ओर पलायन बढ़ा है, जिससे जनसंख्या घनत्व बढ़ रहा है। इससे पेयजल, ट्रैफिक, पार्किंग, और पर्यावरण संबंधी संकट गहरा हो रहे हैं।

Lohardaga News: लोहरदगा,संवाददाता। लोहरदगा जिले की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके अनुरूप आधारभूत सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का विकास नहीं हो पाया है। शिक्षा, रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में बड़ी संख्या में लोग गांवों से शहर में आकर बस रहे हैं। इससे नगर परिषद क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व तेजी से बढ़ा है और सड़क, पेयजल, यातायात, पार्किंग तथा अन्य नागरिक सुविधाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 में लोहरदगा जिले की कुल आबादी 3,64,521 थी, जो 2011 में बढ़कर 4,61,790 हो गई। यानी 10 वर्षों में जिले की आबादी में 97,269 लोगों की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में लोहरदगा नगर परिषद क्षेत्र की आबादी 45 हजार से बढ़कर 56,123 हो गई। शहरी आबादी में लगभग 24.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। समाजशास्त्रियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से शहर की ओर हो रहे पलायन का परिणाम है। बढ़ती आबादी के कारण शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी और पार्किंग संकट गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। मुख्य बाजार और प्रमुख चौक-चौराहों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ने से ट्रैफिक जाम की स्थिति आम हो गई है। पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़क किनारे वाहन खड़े किए जाते हैं, जिससे आवागमन प्रभावित होता है। वहीं, शहर के विस्तार के साथ नए-नए मोहल्ले बस रहे हैं। इसके लिए हरित क्षेत्रों का दायरा लगातार घट रहा है। पेड़ों की कटाई और खुले स्थानों के कम होने से पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर पड़ रहा है。
बढ़ती समस्याएं
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती आबादी के दबाव में तालाबों और अन्य जलाशयों पर अतिक्रमण भी बढ़ा है। इससे भूजल स्तर प्रभावित हो रहा है और गर्मी के दिनों में जल संकट की समस्या और गंभीर होती जा रही है।
आदिवासी जनसंख्या
लोहरदगा आदिवासी बहुल जिला है। वर्ष 2001 में जनजातीय आबादी लगभग 2.40 लाख थी, जो कुल आबादी का करीब 66 प्रतिशत थी। वर्ष 2011 में जनजातीय आबादी लगभग 2.86 लाख रही, लेकिन कुल आबादी में इसका अनुपात घटकर 61.97 प्रतिशत रह गया। जनसंख्या वृद्धि के अनुरूप सड़क, पेयजल, जल निकासी, सार्वजनिक परिवहन, पार्किंग, हरित क्षेत्र और आवासीय सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में शहर की समस्याएं और बढ़ सकती हैं。
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