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25 अक्तूबर, 2020|2:02|IST

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वीरों के आदर्शों से मिलती है प्रेरणा- झामुमो

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हूल दिवस पर लोहरदगा में क्रांतिकारियों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। झामुमो के कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष मोज़म्मिल अहमद ने कहा कि आजादी की पहली लड़ाई आदिवासियों ने सिद्धू कान्हू के नेतृत्व में 1855 में ही विद्रोह का झंडा बुलंद कर दिया था। 30 जून 1855 को सिदो और कान्हू ने मौजूदा साहेबगंज जिले के भागनाडीह गांवमें इस विद्रोह की शुरुआत की थी। मौके पर सिद्धू ने नारा दिया था, करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो। सिददो, कान्हू, चांद और भैरव चारों भाइयों ने लोगों के असंतोष को आंदोलन में बदल दिया। मातृभूमि की रक्षा करते हुए हज़ारों वीर शहीद हो गए। उन वीरों की शहादत हमेशा प्रेरित करेगी। जफ़र इक़बाल ने कहा कि आजादी की लड़ाई में हमारे राज्य से अनेकों वीरों ने अपनी खून से इस मिट्टी को सींचने का काम किया है, और देश को आजदी दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष ऐनुल अंसारी जी ने कहा कि हूल क्रांति में करीब 20 हजार आदिवासियों ने अपनी जान की कुर्बानी दी थी। भारतीय इतिहास में अपना अमिट स्थान बना गए। कार्यक्रम में विष्णु प्रसाद साहू, युवा जिलाध्क्ष अजय उरांव, संजय पांडेय, अख्तर अंसरी, मो फुरकान अहमद, विजय उरांव, वारिस अंसारी, अनिल उरांव रुस्तम खान, आरिफ खान, सोनू कुमार, भृगु महतो, संतोष मांझी, अनूप सिंह आदि मौजूद थे।

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