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किताब से बड़ा कोई मित्र नहीं हो सकता: डॉ राजेश

किताब से बड़ा कोई मित्र नहीं हो सकता: डॉ राजेश

संक्षेप:

लोहरदगा कुड़ू के अविराम कालेज आफ एजुकेशन में दो दिवसीय अंतरर्राष्ट्रीय सेमिनार 'भविष्य की शिक्षा' विषय पर शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों ने शिक्षा में नवाचार, सकारात्मक सोच, और संस्कृति के महत्व पर चर्चा की। छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों से आयोजन को जीवंत किया।

Dec 06, 2025 11:09 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लोहरदगा
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कुड़ू, प्रतिनिधि। लोहरदगा कुड़ू के अविराम कालेज आफ एजुकेशन टीको में शनिवार को प्रवृत्तियों और नवाचार के संदर्भ में भविष्य की शिक्षा विषय पर दो दिवसीय अंतरर्राष्ट्रीय सेमिनार शुरू हुआ। सेमिनार के मुख्य संरक्षक छात्र कल्याण अधिष्ठाता रांची विश्वविद्यालय रांची प्रो डा सुदेश कुमार साहू, मानविकी संकाय के डीन, संस्कृत स्नातकोत्तर विभाग प्रमुख डा अर्चना कुमारी दूबे, ग्लोबल संस्कृत फोरम एवं असिस्टेंट आचार्य नव नालंदा महाविहार संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सचिव डॉ राजेश कुमार मिश्रा, सचिव इंद्रजीत कुमार भारती, प्राचार्य डा प्रतिमा त्रिपाठी ने कार्यक्रम की शुरुआत की। डा राजेश कुमार मिश्र ने कहा कि सकारात्मक सोच और अपने सांस्कृतिक साथ विद्यार्थी आगे बढ़ें।

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एक लक्ष्य को साधकर खुद को झोंक दीजिए, सफलता शत प्रतिशत मिलेगी। हम सब भारतवासी एक ही ऋषि संतान हैं। और हमारे शरीर में उन्हीं का जीन है। हमें अपने अंदर की शक्ति को पहचानने की जरूरत है। पश्चिम का अनुकरण करने की जरूरत नहीं है। किताब से बड़ा कोई मित्र नहीं हो सकता है। वर्तमान दौर में तकनीक बहुत बड़ा संसाधन है, लेकिन हमें तकनीक के ऊपर पूरी तरह से आश्रित न रहकर तकनीक को अपने ऊपर आश्रित रखे। सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रो सुदेश कुमार साहू ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का मुख्य योगदान रोजगार का सृजन है। नवाचार के माध्यम से आप इसे बेहतर कर सकते हैं। घटना क्रमों पर ध्यान रखें और मार्केटिंग करें। नए इनोवेशन के तहत कोई भी सामान को नया आकृति प्रदान कर व्यवसाय कर आर्थिक आय का सृजन कर सकते हैं। डा अर्चना कुमारी दूबे ने कहा कि संस्कृति और संस्कार को बचाना युवाओं के हाथ में है। हमें आगे बढ़ने के लिए निरंतर परिश्रम करना चाहिए। उत्साह के साथ परिश्रम करना और विनम्रता रखना जरूरी है यहां के प्रशिक्षु दक्ष और प्रतिभाशाली हैं। समय प्रबंधन यहां की मुख्य विशेषता है जिसे हमें अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। अविराम के सचिव इंद्रजीत भारती ने कॉलेज स्थापना से लेकर वर्तमान समय की स्थिति और यहां के अनुशासन आदि का वृत्त प्रस्तुत किया। इससे पूर्व अतिथियों का अविराम परिवार कालेज के प्रशिक्षुओं ने भव्य अगवानी व स्वागत किया गया। अतिथियों ने सामूहिक रूप से स्मारिका का विमोचन किया। इस मौके पर बीएड और डीएलईडी के प्रशिक्षुओं ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम, योग नृत्य, भरत नाट्यम आदि प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर सभी शिक्षक और प्रशिक्षु मौजूद थे।