आदिवासी धरोहर, भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने का दिया गया संदेश
लोहरदगा में माघ पंचमी के अवसर पर सिरसी ता नाला में सरना धर्म दर्शन और ककड़ोलाता दोन धार्मिक कांड का भव्य आयोजन किया गया। लाखों श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। मंत्री चमरा लिंडा ने आदिवासी पहचान और विकास के लिए सहयोग की अपील की। पूजा के माध्यम से आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने का संदेश दिया गया।

लोहरदगा, संवाददाता। माघ पंचमी के शुभ अवसर पर बढ़ते चांद की तिथि में सिरसी ता नाला में सरना धर्म दर्शन और ककड़ोलाता दोन धार्मिक कांड का शुक्रवार को भव्य आयोजन किया गया। इसमें लोहरदगा सहित कई जगहों के लाखों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर सरना धर्म की आस्था को नमन किया। कार्यक्रम राजकीय समारोह के रूप में आयोजित हुआ। जिसमें झारखंड के मंत्री मुख्य अतिथि चमरा लिंडा उपस्थित रहे। पहान पेचा मुंडा द्वारा सरना रीति-रिवाज के अनुसार प्रार्थना, पूजा-अर्चना और प्रवचन कराया गया। चमरा लिंडा ने कहा कि आज का दिन सभी धर्मों को याद करने और आदिवासी पहचान को सशक्त करने का दिन है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से आदिवासी समाज की पहचान, विकास और उन्नति के लिए निरंतर सहयोग की अपील की। जिगा सुसारन होरो ने पूजा के माध्यम से आदिवासी धरोहर, भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने का संदेश दिया गया। कुड़ुख भाषा उरांव समाज की अमूल्य धरोहर है। उरांव समाज को सबसे दयालु समाज के रूप में जाना जाता है। कार्यक्रम में सोमे उरांव, सुधीर उरांव, सुधू भगत, सूकेंद्र उरांव, फूलदेव भगत, कृष्णा उरांव, आकाश भगत, राजमुनी उरांव, बसंती उरांव, बिसनी, सुलेख, नीलम सहित विभिन्न राज्यों से आए अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु शामिल थे।
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