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समझौते से बढ़ता है आम जनों का भरोसा: पीडीजे

विवाद का समझौते से समाधान होने से व्यवस्था पर आमजनों का विश्वास बढ़ता है। जो वकील यह सोचते हैं कि समझौते से समाधान के पश्चात उनका केस खत्म हो जाता...

समझौते से बढ़ता है आम जनों का भरोसा: पीडीजे
हिन्दुस्तान टीम,लोहरदगाSat, 25 May 2024 11:45 PM
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लोहरदगा, संवाददाता। विवाद का समझौते से समाधान होने से व्यवस्था पर आमजनों का विश्वास बढ़ता है। जो वकील यह सोचते हैं कि समझौते से समाधान के पश्चात उनका केस खत्म हो जाता है, उन्हें यह जानना चाहिए कि समझौते के पश्चात त्वरित न्याय मिलने के कारण आमजनों का विश्वास बढ़ता है और वे ज्यादा केस लेकर कोर्ट पहुंचते हैं। उक्त बातें प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार अरविंद कुमार पांडेय ने शनिवार को रेफरल जजेज और मेडियेटर को लेकर हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्यस्थों को संबोधित करते हुए कहीं। पीडीजे ने मध्यस्थता के मूल नियमों की व्याख्या करते हुए कहा कि मध्यस्थ को धैर्य से काम लेना चाहिए। दोनों पार्टी को अलग-अलग और समन्वित रूप से सुनना चाहिए, तभी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए। उन्होंने सिविल कोर्ट परिसर स्थित डालसा सभागार में उपस्थित मध्यस्थ, पैनल अधिवक्ताओं और पीएलबी को संबोधित करते हुए यह कहा कि मोटर वाहन से बढ़ते दुर्घटना को लेकर सचेत होने की आवश्यकता है। दुर्घटना किसी के बुलावे से नहीं आती लेकिन दुर्घटना के पश्चात हुए नुकसान की भरपाई के लिए मोटर क्लेम अधिनियम में काफी उपबंध दिए गए हैं । जैसे कि 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के पश्चात उनके आश्रित को पांच लाख रुपए की निश्चित राशि मिलती है। हिट एंड रन के केस में मृत्यु के स्थिति में दो लाख रुपए और गंभीर अवस्था में घायल होने की स्थिति में पचास हजार रुपए का भुगतान किया जाता है। यदि आप कानून को बेहतर तरीके से जानेंगे तभी आम जनों को इसका लाभ दिला पाएंगे। न्यायालयों में लंबित मोटर एक्सीडेंट क्लेम केस कई सालों तक चलते रहते हैं, जिसका कोई मतलब नहीं होता। इसके पूर्व प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अखिलेश कुमार तिवारी ने मोटर एक्सीडेंट के मामले में मृतक के आश्रित को दिए जाने वाले मुआवजा की गणना कैसे की जाती है, उसे विस्तृत रूप से बताया।

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