शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे चूरखाड़ के ग्रामीण
महुआडांड़ के चुरखाड़ गांव में पेयजल संकट गहरा गया है। तेज बारिश के बाद नदी का गंदा पानी चुआड़ी में भर जाने से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन से तत्काल मदद की मांग की गई है।

महुआडांड़, प्रतिनिधि। प्रखंड की गढ़बुढ़नी पंचायत के चुटिया टोला के चुरखाड़ गांव में पेयजल संकट गहरा गया है। 48 घंटे पूर्व हुई तेज बारिश के बाद नदी का गंदा पानी ग्रामीणों के एकमात्र जलस्रोत चुआड़ी में भर जाने से पूरे टोले के सामने शुद्ध पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों ने अपनी परेशानी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में स्थापित जलमीनार लंबे समय से खराब पड़े हैं। ऐसी स्थिति में नदी किनारे स्वयं निर्मित चुआड़ी ही ग्रामीणों के लिए पीने और घरेलू उपयोग का प्रमुख स्रोत था। इसी पानी से परिवारों का दैनिक जीवन संचालित होता था। दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदी में आए उफान के कारण कीचड़, कचरा और गंदगी से युक्त पानी चुआड़ी में प्रवेश कर गया। इसके बाद चुआड़ी का पानी दूषित हो गया है。
पानी की दुर्गंध और स्वास्थ्य जोखिम
ग्रामीणों का कहना है कि पानी से दुर्गंध आ रही है और इसके सेवन से बीमारी फैलने की आशंका बनी हुई है। जलस्रोत दूषित होने के बाद ग्रामीणों को पेयजल के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे दूर-दराज के झरनों एवं अन्य जलस्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं। कई परिवारों के सामने पीने और भोजन बनाने के लिए भी पानी जुटाना चुनौती बन गया है। ग्रामीण महिला ने बताया कि पिछले दो दिनों से स्वच्छ पानी के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने सांसद, विधायक, डीसी लातेहार तथा प्रखंड प्रशासन से अविलंब पेयजल उपलब्ध कराने, खराब पड़े जलमीनारों की मरम्मत कराने तथा स्थायी जलापूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है。
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