दावों के मॉडल, हकीकत में खाली कक्षाएं: लातेहार के मॉडल स्कूलों में नामांकन संकट मनीष उपाध्याय
लातेहार में मॉडल विद्यालय अंग्रेजी माध्यम और सीबीएसई पैटर्न के साथ शुरू हुए, लेकिन नामांकन संकट से जूझ रहे हैं। कक्षाएं खाली हैं और शिक्षक की कमी है। 12वीं में विज्ञान में केवल 2 छात्र और कला व वाणिज्य में कोई नामांकन नहीं हुआ। अभिभावक स्थायी शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों को नामांकित करने से हिचकिचा रहे हैं।

लातेहार संवाददाता। अंग्रेजी माध्यम, सीबीएसई पैटर्न, स्मार्ट क्लासरूम और कौशल आधारित शिक्षा के बड़े दावों के साथ शुरू किए गए मॉडल विद्यालय लातेहार में नामांकन संकट से जूझ रहे हैं। कागज पर यह स्कूल शिक्षा सुधार की मिसाल बताए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग है। कक्षाएं खाली हैं, शिक्षक पद रिक्त हैं और अभिभावकों का भरोसा डगमगाता दिख रहा है। लातेहार जिला में संचालित मॉडल विद्यालयों की मौजूदा स्थिति योजना और वास्तविकता के बीच की खाई को उजागर कर रही है। हालात यह हैं कि सीटें उपलब्ध होने के बावजूद विद्यार्थी दाखिला लेने से परहेज कर रहे हैं।
--------------- 120 सीटें, नामांकन गिनती के जिले के मॉडल विद्यालय मनिका को मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में अपग्रेड किया गया है। इंटरमीडिएट में विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों संकायों में 40-40 सीटें निर्धारित हैं। इसके बावजूद 12वीं विज्ञान में केवल 2 छात्रों ने दाखिला लिया है, जबकि कला और वाणिज्य में एक भी नामांकन नहीं हुआ। 11वीं में कला में 8, वाणिज्य में 3 और विज्ञान में 4 छात्र नामांकित हैं। शिक्षक के अभाव में दो छात्रों ने नामांकन वापस ले लिया। --------------------- शिक्षक नहीं, अनुबंध के भरोसे संचालन विद्यालय में पीजीटी रसायन, अंग्रेजी और जीवविज्ञान समेत कई पद रिक्त हैं। एक ही शिक्षक को कक्षा 6 से 12 तक पढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। जिले के मॉडल विद्यालय बरवाडीह, बालूमाथ और मनिका तीनों में स्थायी प्राचार्य नहीं हैं। अनुबंध पर कार्यरत प्रभारी शिक्षकों के भरोसे संचालन हो रहा है। बरवाडीह में प्रतिनियोजित पीजीटी गणित शिक्षक व्यवस्था संभाल रहे हैं। राज्य स्तर पर 11 पीजीटी, स्थायी प्राचार्य, प्रयोगशाला सहायक और चतुर्थ वर्गीय कर्मियों की नियुक्ति का प्रावधान था, लेकिन बहाली प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हुई है। --------------------------- दूरी, उपस्थिति और गुणवत्ता पर सवाल प्रखंड का एकमात्र सीबीएसई बोर्ड विद्यालय होने के कारण 18 से 20 किमी दूर के छात्र नामांकन तो करा लेते हैं, पर नियमित उपस्थिति दर्ज कराना संभव नहीं हो पाता। 75 प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति मानक पूरा करना चुनौती बन गया है। सूत्रों के अनुसार 11वीं में सभी विषयों में अनुत्तीर्ण छात्रों को 12वीं में प्रमोट किया गया, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और सीबीएसई संबद्धता पर सवाल उठ रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्थायी शिक्षक और नियमित पढ़ाई सुनिश्चित होने पर ही वे बच्चों को नामांकित करने के लिए आगे आएंगे। -------------------------- जैक सख्त, फॉर्म भरवाने का निर्देश कम आवेदन पर झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने नाराजगी जताई है। जिला स्तर से स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि कम से कम 20 से 25 छात्रों से प्रवेश परीक्षा का फॉर्म भरवाया जाए। फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 21 फरवरी तय की गई है। मॉडल स्कूलों की परिकल्पना शिक्षा को नई दिशा देने की थी, लेकिन संसाधनों और स्थायी शिक्षकों की कमी ने इस योजना की रफ्तार धीमी कर दी है। अब देखना यह है कि विभाग समय रहते ठोस पहल करता है या मॉडल विद्यालय केवल कागजी उपलब्धि बनकर रह जाते हैं। फोटो- 7- मॉडल विद्यालय के बाद मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय बना मनिका का स्कूल
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


