
कार्तिक पूर्णिमा पर केचकी संगम में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, दान-पुण्य किया
संक्षेप: बेतला में कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने केचकी संगम में स्नान और दान-पुण्य किया। पीटीआर के टीओ विवेक तिवारी ने बताया कि त्रिपुरारी पूर्णिमा पर सैकड़ों श्रद्धालु स्नान और पूजा करने आए। पुजारियों ने त्रिपुरासुर के वध की कथा सुनाई और देव-दिवाली का उत्सव मनाया।
बेतला प्रतिनिधि । पूर्व की तरह इस वर्ष भी कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने बुधवार को केचकी संगम में डुबकी लगाई और दान-पुण्य किया। वहीं पीटीआर के टीओ विवेक तिवारी ने त्रिपुरारी पूर्णिमा पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं के केचकी संगम में स्नान-ध्यान और दान-पुण्य किए जाने की बात बताई। मौके पर कई लोगों ने दिनभर उपवास रख शाम में परंपरागत तरीके से महादेव त्रिपुरारी की विधिवत पूजा-अर्चना की और घरों-मंदिरों में दीप जलाकर देव-दिवाली का उत्सव मनाया।इस दौरान पुजारी उमेश मिश्र,यशवंत पाठक, श्यामनाथ पाठक,अर्जुन पांडेय,सुरेंद्र पाठक आदि ने भक्तों को दुर्दांत अत्याचारी राक्षस त्रिपुरासुर वध की मार्मिक और रोचक कथा सुनाई।

पुजारियों ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने दुर्दांत राक्षस त्रिपुरासुर का वध कर धरती को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। तभी से भगवान शिव का नाम त्रिपुरारी और कार्तिक पूर्णिमा त्रिपुरारी पूर्णिमा से प्रसिद्ध है ।चूंकि दुर्दांत त्रिपुरासुर के पापों से धरती के मुक्त होने पर सभी देवताओं ने सबसे पहले काशी में दीप जलाकर खुशियां मनाई थी। इसलिए सनातनी परंपरा में आज भी हरेक कार्तिक पूर्णिमा को दिवाली मनाने का प्रचलन अब भी बरकरार है।यह पूरे विश्व में देव-दीपावली के नाम से विख्यात है।उत्सव मनाने में सरईडीह-पोखरी,कुटमू, केचकी,कंचनपुर,अखरा,बेतला आदि गांव के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल थे।

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