जंगल को आग से बचाने की अनूठी पहल, महुआ के पेड़ों के नीचे लग रही जाली
वन विभाग ने छिपादोहर के पूर्वी और पश्चिमी वन क्षेत्र में महुआ के पेड़ों के नीचे जाली लगाने की अनूठी पहल शुरू की है। इससे महुआ सुरक्षित रहेगा और किसानों को उचित मूल्य मिलेगा। यह पहल जंगलों को आग से बचाने में भी मदद करेगी। स्थानीय किसानों ने इस पहल का स्वागत किया है।

छिपादोहर,प्रतिनिधि। जंगलों को आग से बचाने और ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से वन विभाग ने छिपादोहर पूर्वी एवं पश्चिमी वन क्षेत्र में एक अनूठी पहल शुरू की है। डिप्टी डायरेक्टर प्रजेषकांत जेना के निर्देश पर विभिन्न गांवों में महुआ के पेड़ों के नीचे जाली लगाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। अब तक महुआ के फूल जमीन पर गिरकर खराब हो जाते थे, जिससे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। लेकिन जाली लगने के बाद महुआ सीधे पेड़ से जाली में गिरेगा, जिससे वह सुरक्षित रहेगा और उसे आसानी से इकट्ठा कर सुखाया जा सकेगा।
वन विभाग के अनुसार, इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि महुआ चुनने के लिए पेड़ों के नीचे आग लगाने की परंपरा पर रोक लगेगी। इस नई व्यवस्था से जंगल, पेड़-पौधे और वन्य जीवों को आग से होने वाले खतरे से बचाया जा सकेगा। महुआ की बिक्री को लेकर भी विभाग ने पहल की है। किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए एक कंपनी से करार किया गया है, जो फिलहाल 70 रुपये प्रति किलो की दर से महुआ खरीदेगी। रेंजर अजय टोप्पो ने बताया कि वन विभाग जंगलों और वन्य जीवों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसे पूरे पीटीआर क्षेत्र में लागू किया जाएगा। प्रभारी वनपाल नवीन प्रसाद, शशांक पांडेय और राम कश्यप ने बताया कि पेड़ों के नीचे जाली लगाने का कार्य तेजी से जारी है। महुआ को सुखाने के लिए पेड़ के पास धूप वाली जगह पर मचान बनाया जाएगा और भंडारण के लिए विशेष बैग भी उपलब्ध कराए जाएंगे। स्थानीय किसानों ने वन विभाग की इस पहल का खुले मन से स्वागत किया
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