
देश सेवा में हाथ गंवाने वाला जवान को पुनर्वास में किए गए वादे से वंचित
लातेहार के हवलदार अरुण केरकेट्टा, जो देश सेवा में अपने दोनों हाथ गंवा चुके हैं, पुनर्वास के लिए वादा की गई भूमि से वंचित हैं। उन्हें 5 एकड़ भूमि का आवंटन किया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने उपायुक्त से जल्द भूमि का बंदोबस्त करने की अपील की है।
लातेहार,प्रतिनिधि। भारतीय थल सेना के वीर हवलदार अरुण केरकेट्टा, जो देश सेवा के दौरान अपने दोनों हाथ गंवाकर दिव्यांग हो चुके हैं। अब तक पुनर्वास के लिए वादा की गई भूमि से वंचित हैं। अरुण केरकेट्टा, ग्राम जरहाटोली, विजयनगर (महुआडांड़) निवासी हैं और द बिहार रेजीमेंट की सेकेंड बटालियन में हवलदार पद पर कार्यरत रहते हुए ड्यूटी के दौरान गंभीर हादसे का शिकार हुए थे। जिला सैनिक कल्याण पदाधिकारी, लातेहार द्वारा दिनांक 04 दिसंबर 2020 को उनके पुनर्वास हेतु कृषि एवं आवासीय प्रयोजन के लिए 5 एकड़ भूमि (मौजा अहीरपुरवा, खाता सं. 50, प्लॉट सं. 108, 109, 110 एवं 114) उपलब्ध कराने की अनुशंसा की गई थी।

अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा आदेश जारी होने और अंचलाधिकारी द्वारा स्थलीय जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद आज तक भूमि का औपचारिक बंदोबस्त नहीं किया गया है। अरुण केरकेट्टा ने बताया कि वे दिव्यांगता के कारण बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने में असमर्थ हैं। उन्होंने 26 जुलाई 2022 को अंचलाधिकारी महुआडांड़ को आवेदन देकर अपनी पीड़ा व्यक्त की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता से आग्रह किया है कि उनके सम्मानजनक जीवनयापन हेतु जल्द से जल्द भूमि का बंदोबस्त कर पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। यह न केवल एक दिव्यांग सैनिक के सम्मान का प्रश्न है, बल्कि पूर्व सैनिक कल्याण नीति के अनुरूप मानवीय कर्तव्य भी है।

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