कैमा गांव में ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद स्थिति नियंत्रण में

Mar 06, 2026 06:02 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लातेहार
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लातेहार के कैमा गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए। पुलिस ने दो युवकों को पकड़ने की कोशिश की थी, जिसके विरोध में ग्रामीणों ने एकत्र होकर विरोध किया। स्थिति नियंत्रण में है लेकिन क्षेत्र में तनाव बरकरार है। पुलिस की कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

कैमा गांव में ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद स्थिति नियंत्रण में

लातेहार, प्रतिनिधि। सदर थाना क्षेत्र के कैमा गांव में गुरुवार की देर रात ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रण में हैं। झड़प के बाद गांव के बाहर एसएसबी 32 बटालियन,जिला पुलिस और आईआरबी के जवानों की तैनाती कर दी गई हैं। शुक्रवार को कैमा प्राथमिक विद्यालय व आयुष्मान आरोग्य मंदिर खुले रहे। जबकि ग्रामीण अपने अपने दिनचर्या में व्यस्त दिखे। इधर घटना के बाद पूरे क्षेत्र में चौकसी बरती जा रही हैं। जानकारी के अनुसार इस घटना में पुलिस के कई जवान समेत आधा दर्जन ग्रामीण घायल हो गए। जिसमें चार सब-इंस्पेक्टर (एसआई) सहित आईआरबी और जैप के कुल 11 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए।

घायल जवानों में एसआई धर्मवीर कुमार सिंह, सलेंद्र कुमार सिंह (आईआरबी), प्रेमचंद पांडेय (आईआरबी), रामकिशोर उरांव (जैप), विजय कुमार सिंह (आईआरबी), तिलेश्फर लकड़ा (जैप), कन्हैया प्रसाद (आईआरबी), एसआई मोहन रविदास, एसआई रामाकांत गुप्ता,एसआई राजेश झा, पुलिस लाइन के जवान कृष्णा मुरारी, लोबिन मुरमू, गिरिवर प्रसाद, सत्यम कुमार और जवाहर उरांव शामिल है। जिसमें सलेंद्र कुमार सिंह, तिलेस्फर लकड़ा और रामकिशोर उरांव को बेहतर इलाज के लिए डॉ श्रेयांश कुमार ने रिम्स रेफर कर दिया गया है। जबकि ग्रामीणों में संदीप उरांव व निरंजन उरांव समेत आधा दर्जन महिला व पुरूष घायल हैं। ग्रामीणों का इलाज गांव में ही किया गया। क्या है पूरा घटनाक्रम सदर थाना क्षेत्र के कैमा गांव में बीती रात पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई। जिसके बाद पूरे गांव में भय और दहशत का माहौल है। गुरुवार को गांव पहुंचने पर ग्रामीण किसी भी अनजान व्यक्ति से बात करने से कतराते नजर आए। जब ग्रामीणों को बताया गया कुछ लोग उनकी समस्याओं को जानने आए हैं, तब करीब कुछ देर बाद कुछ लोग सामने आए और पूरी घटना की जानकारी दी। ग्रामीण सहाबीर टाना भगत, दिनेश टाना भगत आदि लोगों ने बताया कि पुलिस गांव के संदीप टाना भगत और विशेष टाना भगत को बिछईयांटोंगरी से पकड़कर ले जा रही थी। इसकी जानकारी मिलते ही ग्रामीण घोड़गढ़वा पुल के पास पहुंचे और थाना प्रभारी प्रमोद सिन्हा से गिरफ्तारी का कारण पूछा। ग्रामीणों का कहना था कि यह क्षेत्र पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से संचालित होता है, जहां किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी से पहले गांव को सूचना देना आवश्यक माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, बातचीत के बाद अखाड़ा में बैठक कर सामूहिक निर्णय लेने की सहमति बनी। बैठक के दौरान एक लिखित आवेदन भी दिया गया, जिसमें हरेंद्र उरांव (ड्रोन रखने के मामले ) पर लगाए गए आरोपों पर फिलहाल कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि आगे कोई कार्रवाई होती है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इसके बाद पुलिस ने संदीप टाना भगत और विशेष टाना भगत को ग्रामीणों के बीच सौंप दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान एसआई रामाकांत गुप्ता द्वारा धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, जिसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को दी गई है। उनका कहना है कि मामला शांत होने के बाद पुलिस वहां से चली गई थी, लेकिन करीब आधे घंटे बाद पुलिस दोबारा अखाड़ा के पास पहुंची और एक जवान राजेश कुमार के गुम होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों के साथ मारपीट करने लगी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने कई राउंड फायरिंग भी की। घटना के बाद गांव में डर का माहौल है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ड्रोन का घटना से इस घटना का कोई संबंध नहीं : ग्रामीणपुलिस का आरोप है कि ग्रामीणों ने एक माह पहले कोयला खनन के लिए सर्वे कर रही एक कंपनी का ड्रोन जब्त कर लिया था। वह उसी ड्रोन को छुड़ाने गांव गयी थी। इसी दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर पत्थरबाजी कर दी। हालांकि ग्रामीणों ने इस दावे से इनकार किया है। ग्रामीणों का कहना है कि ड्रोन का गुरुवार रात की घटना से कोई संबंध नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, कंपनी का ड्रोन करीब डेढ़ माह पहले जब्त किया गया था, यदि पुलिस कंपनी ड्रोन की खरीद रसीद, ऑपरेटर का लाइसेंस और ग्रामसभा की अनुमति का दस्तावेज दिखा देती है, तो ड्रोन वापस कर दिया जायेगा। ग्रामीणों का कहना है कि गुरुवार रात की घटना गांव के दो युवकों को पकड़कर ले जाने और ग्रामीणों पर लाठीचार्ज किये जाने के बाद हुई। झड़प के बाद गांव के बाहर तैनात किए गए पुलिसकर्मी कैमा गांव में बीती रात्रि पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प के बाद गांव के बाहर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पुलिस कर्मियों में एसएसबी 32 बटालियन,जिला पुलिस और आईआरबी के जवान से शामिल हैं। हालांकि पुलिस का दावा है कि मामला पूरी तरह से शांत कर दिया गया है और माहौल शांतिपूर्ण है। परंतु ग्रामीण के अंदर पुलिस के इस रवैये का प्रति अभी भी आक्रोश है। गांव के कुछ युवक अभी भी लाठी, डंडा लेकर गांव के विभिन्न क्षेत्रों में बाइक से गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

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