आमलकी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने की आंवला वृक्ष की पूजा
बेतला में आमलकी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने उपवास रखा और आंवला वृक्ष की पूजा की। पुजारियों ने भक्तों को धार्मिक कथाएं सुनाई और बताया कि आंवला वृक्ष में त्रिदेव का वास होता है। इस दिन का व्रत रखने से सभी पाप समाप्त होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

बेतला, प्रतिनिधि। आमलकी एकादशी पर क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को उपवास रख भगवान विष्णु के साथ ही आंवला वृक्ष की काफी श्रद्धा व उत्साह से विधिवत पूजा-अर्चना की। मौके पर पुजारी श्यामनाथ पाठक,यशवंत पाठक,अर्जुन पांडेय,नितीश पाठक आदि ने भक्तों को वैदिशराज चित्ररथ,विदुरथ और बहेलिए की बेहद मार्मिक और रोचक कथा सुनाई। वहीं कल्याणपुर शिव मंदिर के पुजारी सुरेंद्र पाठक ने धार्मिक ग्रंथों के हवाले से कहा कि तुलसी के पौधों में सिर्फ भगवान विष्णु और बेल-वृक्ष में महादेव शिव का, पर आंवला वृक्ष में ब्रह्मा,विष्णु और महेश तीनों (त्रिदेव) का वास होता है।ऐसी मान्यता है कि आमलकी एकादशी के व्रतियों के सभी पाप खत्म हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इसलिए सभी सनातनियों को फाल्गुन शुक्ल 11 तिथि पर आमलकी एकादशी का व्रत रखना बेहद जरूरी है। क्योंकि एक वर्ष के सभी 24 एकादशियों में इसकी एक अलग पहचान है।
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