तीनों निकायों की होशियार जनता ने खामोशी से चुना अपना अध्यक्ष
फोटो: रमेश हर्षधर को दिनरात चिढ़ाने में लगे हैं। कुल मिलाकर यही हाल जिले के दो अन्य निकाय मसलन नगर पंचायत कोडरमा और नगर पंचायत डोमचांच का है। मूलभूत

कोडरमा। झुमरीतिलैया नगर परिषद में कई साल से बदहाली चरम पर थी। नगर निकाय भंग होने के बाद हर योजनाओं में लापरवाही बरतने की बात कही जाती रही है। ऐसे कई उदाहरण शहर में हैं जो जनता को दिनरात चिढ़ाने में लगे हैं। कुल मिलाकर यही हाल जिले के दो अन्य निकाय मसलन नगर पंचायत कोडरमा और नगर पंचायत डोमचांच का है। मूलभूत समस्याओं से जूझ रही लाखों जनता के मन में दर्जनों सवाल सुलग रहे थे। जैसे सड़क, नाली, पेयजल, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट और अतिक्रमण की दुर्गति झेल रही तीनों निकायों की जनता नगर परिषद और नगर निकाय के अधिकारियों से पनाह मांग रही थी।
सभी के मन में एक ही बात घर कर गई थी कि जिले का तीनों नगर निकाय केवल भारी भरकम टैक्स लेता है, सुविधाएं नहीं देता। इस विषय को लेकर लोगों के मन में यह बात भी चल रही थी कि इन तीनों जगहों पर एक सुलझे हुए नेता की जरूरत है। जो जमीन से जुड़ा हो, लोगों की समस्याओं को महसूस करता हो। खासकर झुमरीतिलैया को। हर बार अनुभवों के आधार पर ही निर्णय लेती है जनता शहर के कुछ राजनीतिकारों का मानना है कि चुनाव परिणाम स्थानीय मुद्दों की प्राथमिकता को दर्शाता है। लोगों के मन में कई बातें चल रही थीं। इस बार मतदाताओं ने उम्मीदवारों की उपलब्धता, उनका संवाद, उनका व्यवहार और उनकी जवाबदेही जैसे पहलुओं को अधिक महत्व दिया। वैसे, महत्व दे क्यों नहीं, जनता तो हर बार और हर समय-अपने अनुभवों के आधार पर ही निर्णय लेती है। यही वजह है कि जमीन से जुड़े रहनेवाले समाजसेवी रमेश हर्षधर, साजिद हुसैन लल्लू और उमेश वर्मा को लोगों ने शहर की सरकार के शीर्ष पद पर बैठाया। यह नाम महज सामाजिक कार्यों के प्रति जुड़ाव का नहीं, समाज सेवा में भी जाना-पहचाना नाम है। समाज के लिए खड़े रहे, समाज ने ही कुर्सी पर बैठाया बातचीत के दौरान रमेश हर्षधर के परिवार वालों ने कहा कि शुरू से ही समाज के लिए खड़े हैं। इसलिए जनता ने इनको नगर परिषद के अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया। इस बार का चुनाव परिणाम भी कुछ इसी तरह का इशारा करता है कि मतदाता अब केवल घोषणाओं से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि वह स्थायी समाधान और बेहतर प्रबंधन की अपेक्षा करता है। सबसे बड़ी बात यह है कि लोगों की प्रतिक्रिया को किसी के प्रति विरोध या असंतोष के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर शहर और सुचारू नगर व्यवस्था की आकांक्षा के रूप में समझा जाए। बात जो भी हो, मगर लोकतंत्र में यही प्रक्रिया व्यवस्था को मजबूत बनाती रही है। इस बार झुमरीतिलैया के मतदाता शुरू से ही शालीनता के साथ अपना मूड बना चुके थे। विकास, संवाद व विश्वास को ही सबसे बड़ी कसौटी मानकर जिले के तीनों निकायों की जनता ने रमेश हर्षधर, साजिद हुसैन लल्लू और उमेश वर्मा को चुना। आलम यह था कि चुनाव की घोषणा के दिन से ही मतदाता पूरी तरीके से शांत थे। यह कहा जा सकता है कि अंडर करंट चल रहा था।
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