तीनों निकायों की होशियार जनता ने खामोशी से चुना अपना अध्यक्ष

Feb 28, 2026 01:21 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कोडरमा
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निर्णय लेती है इस बार मतदाताओं ने उम्मीदवारों की उपलब्धता, संवाद, व्यवहार और जवाबदेही जैसे पहलुओं को अधिक महत्व दिया ओमप्रकाश कोडरमा। विगत कई साल से

 तीनों निकायों की होशियार जनता ने खामोशी से चुना अपना अध्यक्ष

एंकर: तीनों निकायों की होशियार जनता ने खामोशी से चुना अपना अध्यक्ष फोटो। तीनों अध्यक्ष का फोटो है। चुनाव परिणाम स्थानीय मुद्दों की प्राथमिकता को दर्शाता है, जनता हर बार और हर समय-अपने अनुभवों के आधार पर ही निर्णय लेती है इस बार मतदाताओं ने उम्मीदवारों की उपलब्धता, संवाद, व्यवहार और जवाबदेही जैसे पहलुओं को अधिक महत्व दिया ओमप्रकाश कोडरमा। विगत कई साल से अपने जिले के तीनों नगर निकायों में बदहाली चरम पर थी। नगर निकाय भंग होने के बाद हर योजनाएं हवा-हवाई रही। मगर यहां के लोगों के मन में दर्जनों सवाल थे, जो जमीन पर ही थे। मसलन सड़क, नाली, पेयजल, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट और अतिक्रमण जैसी दुर्गति को झेल रही यहां की जनता नगर परिषद के अधिकारियों से पनाह मांग रही थी।

सभी के मन में एक ही बात घर कर गई थी कि जिले का तीनों नगर निकाय केवल टैक्स लेता है, सुविधाएं नहीं देता। इस विषय को लेकर लोगों के मन में लगातार सवाल सुलग रहे थे। लोगों के मन में यह बात भी चल रही थी कि तीनों निकायों को एक सुलझे हुए नेता की जरूरत है। खासकर झुमरीतिलैया को। शहर के कुछ लोगों का मानना है कि चुनाव परिणाम स्थानीय मुद्दों की प्राथमिकता को दर्शाता है। लोगों के मन में कई बातें चल रही थीं। इस बार मतदाताओं ने उम्मीदवारों की उपलब्धता, संवाद, व्यवहार और जवाबदेही जैसे पहलुओं को अधिक महत्व दिया। वैसे, जनता हर बार और हर समय-अपने अनुभवों के आधार पर ही निर्णय लेती है। जमीन से जुड़े रहनेवाले रमेश हर्षधर, साजिद हुसैन और उमेश वर्मा को को इस बार लोगों ने चुना। यह नाम सामाजिक कार्यों के प्रति जुड़ाव ही नहीं समाज सेवा में भी जाना-पहचाना नाम है। बातचीत के दौरान रमेश हर्षधर के परिवार वालों ने कहा कि ये शुरू से ही समाज के लिए कुछ करने की लेकर चले हैं। इस बार का चुनाव परिणाम भी कुछ इसी तरह का इशारा करता है कि मतदाता अब केवल घोषणाओं से संतुष्ट नहीं है, बल्कि वह स्थायी समाधान और बेहतर प्रबंधन की अपेक्षा करता है। सबसे बड़ी बात यह है कि लोगों की प्रतिक्रिया को किसी के प्रति विरोध या असंतोष के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर शहर और सुचारू नगर व्यवस्था की आकांक्षा के रूप में समझा जाए। बात जो भी हो, मगर लोकतंत्र में यही प्रक्रिया व्यवस्था को मजबूत बनाती रही है। इस बार झुमरीतिलैया के मतदाता शुरू से ही शालीनता के साथ अपना मूड बना चुके थे। विकास, संवाद व विश्वास को ही सबसे बड़ी कसौटी मानकर जिले के तीनों निकायों की जनता ने रमेश हर्षधर, साजिद हुसैन लल्लू और उमेश वर्मा को चुना। आलम यह था कि चुनाव के घोषणा के दिन से ही मतदाता पूरी तरीके से शांत थे। यह कहा जा सकता है कि अंडर करंट चल रहा था।

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