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25 नवंबर, 2020|1:41|IST

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कृषि को माइका का विकल्प बनाने की है योजना

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झारखंड सरकार द्वारा आयोजित पीसीपीएनडीटी (सीबीटी) अल्ट्रासाउंड की परीक्षा में राज्य का टॉपर और ऑल इंडिया पीजी में छट्ठा रैंक पाने वाले डॉ. मनोज कुमार इन दिनों यावाओं को खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। खेती से उनका विशेष लगाव है और अपने दैनिक जीपन की शुरुआत भी खेतों से ही करते हैं। कोडरमा में कृषि को माइका का विकल्प के रुप में विकसित करना उनका सपना है। इस बारे में डॉ. मनोज ने कहा कि लॉकडाउन में उन्होंने अपनी जमीन पर पपीता, केला और गन्ना लगाया है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरी करना उनका लक्ष्य नहीं है। खुद खेती करना और इसे बढ़ावा देना लक्ष्य है। उन्होंने भावी योजनाओं के बारे में बताया कि जिला में कृषि प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना है जहां जिले के किसानों को ट्रेनिंग दी जा सके।

उन्होंने कहा कि खेती एक ऐसा माध्यम है जिससे जिले के पलायन को रोका जा सकता है। खेती से लोग स्वस्थ भी रहेंगे और आर्थिक रुप से उन्नत भी होंगे। उन्होंने जिले के संबल और शिक्षित लोगों को कृषि से जुड़कर समाज के लिए प्रेरणा बनने की जरुरत बताई। उन्होंने खेती के लिए तीन एकड़ जमीन भी खरीदी है। डॉ. मनोज ने जिले के युवाओं से खेती से जुड़कर जिला और खुद को आर्थिक रुप से उन्नत करने की जरुरत बताई है। बता दें कि डॉ. मनोज मरकच्चो के पूर्व सरपंच गोविंद शरण मोदी और कौशल्या देवी के पुत्र हैं। खेती के साथ-साथ वे फिलवक्त झुमरी तिलैया के देव मिडकल्स में आंख, कान, नाक और गला रोग के विशेषज्ञ हैं।

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  • Web Title:Plan to make agriculture an alternative to mica