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1 अगस्त, 2020|3:11|IST

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शिक्षा का व्यापारीकरण व निजीकरण का रास्ता है नई शिक्षा नीति: संजय

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कर्मभूमी में मुंशी प्रेमचंद ने लिखा था कि यह किराए की तालीम हमारे कैरेक्टर को तबाह किए डालती है। हमने तालीम को भी व्यापार बना लिया है। व्यापार में ज्यादा पूंजी लगाओ,ज्यादा नफा होगा। तालीम में भी ज्यादा खर्च करो,ज्यादा ऊंचा ओहदा पाओगे। मैं चाहता हूं उंची से उंची तालीम सबके लिए मुफ्त हो,ताकि गरीब से गरीब आदमी उंची से उंची लियाकत हासिल कर सके और उंचे से उंचा ओहदा पा सके। प्रेमचंद की 140वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए डीवाईएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय पासवान ने नई शिक्षा नीति पर कहा कि भारतीय शिक्षा का व्यापारीकरण,निजीकरण की ओर ले जाने का रास्ता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। इसमें स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकार इसे भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक मील का पत्थर बता रही है। जबकि शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हितधारक चाहे वो छात्र,शिक्षक या फिर शिक्षा से जुड़े शिक्षाविद सभी इसकी आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति देश में शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर करेगी और गरीब जनता जिसका बड़ा तबका पहले से ही शिक्षा से बाहर है,उसे शिक्षा में समाहित करने के बजाए,उन्हें शिक्षा से और दूर करेगी.कहा जा रहा है कि मल्टीपल एग्जिट छात्रों की भलाई के लिए है। उन्होंने कहा कि सच्च यह है कि अब तक जो कॉलेज,विश्वविद्यालय थे,अब वही शिक्षा की दुकानें कहलाएंगी। इसी को ग्रेडेड ऑटोनोमी कहा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि मोदी सरकार द्वारा लायी गयी नई शिक्षा नीति शिक्षा को विदेशी और देशी कॉरपोरेट के लिए मुनाफ़ा कमाने के बतौर साधन तब्दील करने की साजिश है। केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा दर्ज सभी आपत्तियों और विपक्ष को दरकिनार कर नई शिक्षा नीति लागू करना संविधान का घोर उल्लंघन है। मसौदा को संसद की मेज पर रखा जाना चाहिए। जिस पर संसद सदस्य अपनी राय दे सके। उसके बाद ही एनइपी लागू होना चाहिए।

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  • Web Title:New education policy is the way for commercialization and privatization of education Sanjay