
जिले में खिलाड़ियों के भविष्य से हो रहा खेला, नहीं हैं कोई संसाधन
संक्षेप: कोडरमा जिले में खिलाड़ियों के विकास के लिए संसाधनों की कमी एक बड़ी समस्या बन गई है। झुमरी तिलैया में कोई स्टेडियम नहीं है, और तीरंदाजी केंद्र कोच के अभाव में बंद है। खिलाड़ियों को उचित अभ्यास के लिए मैदान नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी प्रतिभा कुंद हो रही है। सरकारी सहायता भी अपर्याप्त है।
कोडतमा हिन्दुस्तान प्रतिनिधि कोडरमा जिले में खिलाड़ियों के विकास में संसाधन का अभाव रोडा बन रहा है। हाल यह है कि जिले का शहरी क्षेत्र झुमरी तिलैया जहां करीब एक लाख से ज्यादा आबादी है वहां एक भी स्टेडियम का निर्माण नहीं हो सका है। खेल ग्राउंड के अभाव में खिलाड़ी काफी मुश्किल का सामना कर रहे है। सरकार स्तर से भी पर्याप्त संसाधन खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा है। इधर, महज कागजों पर ही खेल विभाग कोडरमा की देखरेख में झुमरी तिलैया सीएच प्लस टू हाई में ताइक्वांडो डे बोडिंग प्रशिक्षण केंद्र संचालित है, जहां 25 बालिकाओं को प्रशिक्षण देने की बात कही जाती है।

मगर सच्चाई यहां आकर ही पता चलेगा। या फिर कोई अधिकारी जांच करेंगे तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। कोडरमा के बागीटांड स्टेडियम में पूर्व से खेलो इंडिया सेंटर के तहत चल रहा तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र भी कोच के अभाव में बंद पड़ा है। कोच के चले जाने के कारण यहां बालक और बालिका के 30 प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे खिलाड़ी फिलहाल इस प्रशिक्षण से दूर हैं। वहीं जिले में क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी, कुश्ती के अच्छे खिलाड़ी होने के बावजूद संसाधन के अभाव में अपने मुकाम को हासिल करने में नाकाम हो रहे हैं। सरकार से खिलाड़ियों को जिस स्तर से संसाधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री फुटबॉल टूर्नामेंट भी पिछले 1 वर्ष से बंद पड़ा है। इधर, जिला खेल पदाधिकारी तुषार राय दावा करते हैं कि कोडरमा जिले में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा देने के लिए जल्द ही जिला स्तर पर एक स्टेडियम का निर्माण होगा। मगर कबतक के सवाल पर चुप हो जाते हैं। उनका दावा है कि करमा में इंडोर और आउटडोर स्टेडियम का निर्माण कराया जाएगा। वही उन्होंने कहा कि कोडरमा प्रखंड और जयनगर प्रखंड एक एक स्टेडियम बने हुए हैं। वहीं अन्य सभी चारों प्रखंड में स्टेडियम का निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा। जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, परंतु उनके अभ्यास के लिए खेल मैदानों का बेहद अभाव है। मैदान के अभाव में जिले के खिलाड़ियों का अभ्यास कुंद होता जा रहा है। वहीं विभाग द्वारा खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने के लिए डे-बोर्डिंग और पोटो हो खेल विकास योजना के तहत खिलाड़ियों को सुविधाएं तो दी गईं, मगर यह सुविधा जिले में पूरी तरीके से दम तोड़ चुकी है। जिले के खिलाड़ी खेल मैदान और अभ्यास की कमी के कारण पिछड़ रहे हैं। यदि जिले के खिलाड़ियों को खेल मैदान, सामुचित संसाधन और कोच मिल जायें तो जिले के खिलाड़ी भी बेहतर परिणाम दे सकते हैं। इसके बावजूद भी जिले के खिलाड़ी अपने दम पर जिले के लिए मेडल जीतकर जिले का नाम रौशन कर रहे हैं। जिले में खेल के तमाम संगठन मौजूद हैं। मगर सभी के पास काम चलाऊ संसाधन उपलब्ध हैं। खिलाड़ियों की मानें तो जिला मुख्यालय में ही बेहतर मैदान की कमी है। उससे उन्हें प्रैक्टिस करने में परेशानी होती है।

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